H. D. Kumaraswamy shedding tears over his ruin, now what is the benefit of repenting

कुमारस्वामी को समझना चाहिए कि अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत!

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जदसे नेता एचडी कुमारस्वामी की हालत यह है कि सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया, दिन में अगर चिराग जलाए तो क्या किया! अब वे पछता रहे हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करके उन्होंने बहुत बड़ी गलती की थी और जो कुछ भी कमाया था, वह सब खत्म हो गया. कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि यदि उन्होंने बीजेपी के साथ अच्छे संबंध कायम रखे होते तो आज कर्नाटक के मुख्यमंत्री वही होते. कुमारस्वामी को समझना चाहिए कि अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत! राजनीति में जिसका गणित बिगड़ा, वह कहीं का नहीं रहता. न केवल कुमारस्वामी, बल्कि उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा भी अपनी विफलताओं के लिए कांग्रेस को दोष देते रहे हैं. उन्हें इस बात से तसल्ली नहीं है कि किस्मत से इतने समय तक सत्ता सुख भोग लिया. यह लोकतंत्र है, जिसमें जनता कभी अर्श पर ले जाती है तो कभी फर्श पर लाकर पटक देती है. किसी भी नेता को हमेशा पद पर बने रहने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. नेताओं की मौकापरस्त मनोवृत्ति जनता भली भांति समझती है और पद लोलुप नेता को कभी न कभी करारा झटका देने से नहीं चूकती.

बैसाखियों पर टिकी सरकार 

चाहे एचडी देवगौड़ा हों या उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी, इनकी सरकार हमेशा बैसाखियों पर टिकी रही. केंद्र में एचडी देवगौड़ा की संयुक्त मोर्चा सरकार को कांग्रेस तथा गैर बीजेपी पार्टियों का समर्थन था. यह ऐसी चमकविहीन सरकार थी जिसके सूत्र कांग्रेस के हाथों में थे. जब कांग्रेस का मन हुआ, उसने दबाव डालकर देवगौड़ा की जगह आईके गुजराल को प्रधानमंत्री बनवा दिया था. देवगौड़ा ऐसे एकमात्र प्रधानमंत्री रहे जिन्हें हिंदी नहीं आती थी. जब लाल किले से उन्होंने स्वाधीनता दिवस का भाषण दिया तो उनके कन्नड़ भाषण का हिंदी अनुवाद उनके एक मंत्री सीएम इब्राहिम ने किया था. देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी की कर्नाटक में बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार थी. यह तय हुआ था कि ढाई वर्ष कुमारस्वामी मुख्यमंत्री रहेंगे और फिर ढाई वर्ष बीजेपी का मुख्यमंत्री रहेगा. कुमारस्वामी पद नहीं छोड़ने पर अड़ गए. बीजेपी से नाता टूटने के बाद उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन किया लेकिन कांग्रेस का इतना दबाव रहा कि वे शक्तिहीन बनकर रह गए थे. अब कुमारस्वामी को अहसास हुआ है कि उन्होंने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर बहुत बड़ी गलती की. इसके लिए उन्होंने अपने पिता एचडी देवगौड़ा को भी दोष दिया. उन्होंने कहा कि 2018 में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद सिद्धारमैया और उनके गुट ने मेरी प्रतिष्ठा को नष्ट किया. मैं उनके जाल में फंसता चला गया क्योंकि मैं देवगौड़ा के कारण गठबंधन के लिए सहमत था. कुमारस्वामी ने अफसोस जताते हुए कहा कि 2006 से 2007 और फिर 12 वर्ष की अवधि में मैंने जो कुछ कमाया, वह सब कुछ कांग्रेस के साथ गठबंधन करके खो दिया. कांग्रेस से हाथ मिलाना मेरी सबसे बड़ी गलती थी. कुमारस्वामी चाहे जो भी कहें लेकिन उनकी साख तभी नष्ट हो गई थी जब उन्होंने बीजेपी से वादाखिलाफी की थी. कांग्रेस के साथ उन्होंने पदलोलुपता के कारण गठबंधन किया था.

सिद्धारमैया ने की खिंचाई

कर्नाटक के पूर्व मुख्य्मंत्री व कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि कुमारस्वामी झूठ बोलने में माहिर हैं. उनकी कभी कोई गुडविल या साख नहीं रही. राजनीतिक फायदे के लिए वे असत्य बोलते हैं. कांग्रेस के पास 80 सीटें थीं जबकि जदसे के पास केवल 37 सीटें, लेकिन फिर भी हमने कुमारस्वामी को 15 महीने तक सीएम बनाया. वे वेस्टएंड होटल से सरकार चलाते थे और हमेशा शिकायत करते रहते थे कि उनकी कुछ भी नहीं चलती और कोई उनकी सुनता नहीं. एचडी देवगौड़ा के परिवार में ऐसा ही रोने और बेबुनियाद शिकायत करने का कल्चर है. वह खुशी में भी रोते हैं और दुख में भी. वे लोगों का भरोसा जीतने और उन्हें प्रभावित करने के लिए रोते हैं. इसलिए कुमारस्वामी के आंसुओं की कोई कीमत नहीं है.

अब बीजेपी क्यों पूछेगी

येदियुरप्पा के नेतृत्व में बीजेपी खुद के बलबूते कर्नाटक में सरकार चला रही है. उसने जदसे के साथ गठबंधन करके देख लिया कि वह भरोसेमंद नहीं है. अब कुमारस्वामी कितना ही पछताएं कि बीजेपी से अच्छे रिश्ते होते तो वे सीएम बने रहते, उन पर बीजेपी कोई कृपा करने वाली नहीं है. अब हाथ मलने से कुमारस्वामी को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है.