सरकार से नहीं संभल रही अर्थव्यवस्था

    देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के मामले में केंद्र सरकार बुरी तरह विफल साबित हुई है. महंगाई की जबरदस्त मार से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है. थोक महंगाई रिकार्ड ऊंचाई पर जा पहुंची है जबकि खुदरा महंगाई दर भी 6 महीने में सबसे ज्यादा है. पेट्रोल-डीजल की निरंतर बढ़ रही बेलगाम कीमतों और खाने-पीने की सामग्री की लगातार मूल्यवृद्धि से मई में खुदरा महंगाई दर (सीजीआई) 6.3 फीसदी के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. अप्रैल में यह आंकड़ा 4.23 प्रतिशत था. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार मई में फूड इनफ्लेशन (खाने-पीने की वस्तुओं की दर) 5.01 फीसदी पर पहुंच गया जो कि अप्रैल में 1.96 फीसदी था. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार मई में थोक महंगाई दर 12.94 के स्तर पर जा पहुंची जबकि 1 वर्ष पूर्व मई 2020 में यह -3.37 प्रतिशत रही थी. होलसेल प्राइस इंडेक्स पर आधारित महंगाई दर लगातार 5 महीनों में ऊपर जा रही है. अप्रैल में भी यह दर 10.49 प्रतिशत थी.

    पेट्रोल-डीजल, बिजली खाद्य वस्तुओं के बढ़े दाम

    खुदरा महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पेट्रोल-डीजल, बिजली की दरों व खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई भारी तेजी है. पेट्रोल-डीजल के दाम रिकार्ड तोड़ स्तर पर बढ़े हैं और लगातार बढ़ते जा रहे हैं. दाल की कीमत अप्रैल में 7.51 फीसदी से बढ़कर मई में 9.39 फीसदी हो गई. कपड़े, फुटवियर, दुग्ध उत्पाद सहित रोजमर्रा की ज्यादातर चीजों की कीमत पिछले माह से काफी बढ़ी हैं. अगर महंगाई इसी तरह धड़ल्ले से बढ़ती चली गई तो भारतीय रिजर्व बैंक अगस्त में होने वाली अपनी अगली मौद्रिक समीक्षा में दरें बढ़ा सकता है जो पिछले वर्ष मई से स्थिर हैं.

    आसमान छूती थोक महंगाई

    महंगे पेट्रोलियम और बेस इफेक्ट के चलते थोक महंगाई दर 12.94 प्रतिशत के रिकार्ड स्तर पर जा पहुंची. मई 2020 के मुकाबले क्रूड ऑइल, नेफ्था, फर्नेस ऑइल तथा मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ने से भी मई माह में महंगाई बढ़ी हैं.

    टैक्स क्यों नहीं घटाया जाता

    पेट्रोल 107 रुपए से ऊपर है और डीजल भी 100 रुपए के करीब जा पहुंचा है. केंद्र और राज्य सरकारें एक्साइज ड्यूटी व अन्य करों में रियायत दें तो इनकी कीमतों पर अंकुश लग सकता है. महंगाई की चक्की में पिस रही आम जनता की परेशानी पर सरकार का जरा भी ध्यान नहीं है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च के मुताबिक पेट्रोल-डीजल पर लागू एक्साइज ड्यूटी से सरकार को फिलहाल जो आय हो रही है, वह उसके बजट अनुमान से ज्यादा है. एसबीआई के समूह प्रमुख आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष के अनुसार महामारी के बीच जब सब कुछ ठप है, तब सरकारी खजाने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बफर की तरह हैं. इनमें कमी की कोई संभावना नहीं है. सरकार इस आय से साधन जुटा रही है.