पर्यावरण आंदोलन का समाज में प्रभावी रूप से अमल होना चाहिए

– निमगांव वाघा में वन औषधि पौधों की बोआई के समय किशन वाबले का प्रतिपादन

अहमदनगर. बढ़ते शहरीकरण के कारण बडे़-बडे़ पेडों की बेशुमार कटौती की जा रही है. वृक्ष,जंगल खत्म होने के कारण ग्लोबल वार्मिंग के चलते लगातार बारिश कम होती जा रही है. अकाल की स्थिति को हमेशा के लिए दूर करने के लिए नागरिकों में वृक्षारोपण और संवर्धन की रूचि निर्माण कराना आवश्यक है. सामाजिक ध्यान और प्रतिबध्दता के रूप में पर्यावरण आंदोलन पर प्रभावी रूप से अमल होना जरुरी है.ऐसा प्रतिपादन नवनाथ विद्यालय के मुख्याध्यापक किशन वाबले ने किया.

नगर तहसील के निमगांव वाघा गांव में श्री नवनाथ युवा मंडल और डोगरे बहुउद्देशीय संस्था के संयुक्त तत्वाधान वृक्षारोपण और पर्यावरण संवर्धन का उपक्रम शुरू किया गया है. इस उपक्रम के तहत नवनाथ विद्यालय में वन औषधि पेड पौधे लगवाने के अवसर पर वाबले बोल रहे थे. डोंगरे संस्था के अध्यक्ष नाना डोंगरे,साहबराव बोडखे,शुभांगी धामणे,सुरेश अंधारे,भाग्यश्री शिंदे,स्नेहा उधार,युवा मंडल के अध्यक्ष संदीप डोंगरे,सचिव प्रतिभा डोंगरे आदि उपस्थित थे.

वन औषधि के पौध लगाए गए

विद्यालय के परिसर में विविध प्रकार की वन औषधि के पौध लगाए गए. नाना डोंगरे ने कहा कि पर्यावरण संवर्धन के लिए नवनाथ युवा मंडल और डोंगरे संस्था के उपक्रम निश्चित ही सराहनीय हैं. भारी संख्या में पेडों की कटौती होने से अनेक दुर्लभ प्रजाति के वृक्ष खत्म होने की स्थिति में है.औषधि वनस्पतियों की अनेक प्रजाति भी नष्ट होने के मार्ग पर है. विगत कुछ समय से पूरे विश्व को आयुर्वेद का महत्व समझने लगा है. इसी कारण देश में उपलब्ध वन औषधि वनस्पतियों का संवर्धन और जतन करना जरुरी है.