18,000 children infected in Nashik, first infected on 28 March 2020
प्रतीकात्मक तस्वीर

    • माता,पिता के प्यार से हुए वंचित

    अकोला. कोरोना वायरस के संक्रमण से बच्चों के पालकों की मौत होने से बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है. जिले में 21 मई 2021 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 74 बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठने की जानकारी मिली है. जिसमें 41 बालक व 33 बालिकाओं का समावेश है. जिससे यह बच्चें माता-पिता के प्यार और मार्गदर्शन से वंचित हो गए हैं. इस ओर सरकार ने ध्यान देकर बच्चों का पुनर्वसन करना चाहिए. उनकी पीड़ा को समझते हुए उनका संपूर्ण खर्च उठाकर भरण पोषण करने की व्यवस्था करवानी चाहिए.

    बाल संगोपन योजना का लाभ

    कोरोना वायरस से माता-पिता का साया खो देनेवाले बच्चों को बाल संगोपन योजना का लाभ मिलेगा. लेकिन योजना में शर्त व नियम के अनुसार पात्र बच्चों को ही योजना का लाभ मिलनेवाला है. जिससे सरकार की यह योजना जस की तस ही है. योजना में बच्चों की शिक्षा के लिए प्रति माह 1,100 रू. का अनुदान मिलेगा. वह भी सिर्फ 18 वर्ष की आयु तक ही बच्चों को यह लाभ मिल सकेगा. सरकार का काम है कि इस मामले में नियम को थोड़ा शिथिल करते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सभी बच्चों को योजना का लाभ मिल सके, ऐसे कदम उठाने चाहिए. 

    74 बालकों के सिर से साया उठा

    जिले में कोरोना वायरस से 74 बच्चों ने माता, पिता का साया खोया है. जिसमें 45 बच्चों ने पिता और 29 बच्चों ने माता का साया खो दिया है. जिसमें से 26 लड़के व 19 लड़कियों ने पिता तथा 15 लड़के व 14 लड़कियों ने माता का साया खो दिया है.

    बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ – मरसाले

    इस संदर्भ में जिला महिला व बालविकास अधिकारी विलास मरसाले से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस से 21 मई तक जिले के 74 बच्चों ने माता, पिता का साया खोया है. जिसमें 45 बच्चों के पिता और 29 बच्चों के माता का कोरोना से मौत हुई है. माता, पिता का साया खो देनेवाले बच्चों का पुनर्वसन किया जाएगा.

    बालसंगोपन योजना के अंतर्गत बच्चों की शिक्षा के लिए प्रतिमाह 1,100 रू. का अनुदान 18 वर्ष की आयु तक दिया जाएगा. जिन बच्चों की खस्ता हालत है, उन बच्चों का बालगृह में संगोपन किया जाएगा. वहां पर उनकी पूरी तरह से व्यवस्था की जाएगी. 74 बच्चों को नियम व शर्त के अनुसार योजना का लाभ मिलेगा. जिसमें 54 बच्चों का समावेश होने की संभावना है.