Papaya Crop

    • मामला दर्ज करने के आदेश

    अकोला. तेल्हारा तहसील के किसानों ने ‘आइसबेरी’ किस्म के पपीते के पौधे लगाए थे. लेकिन अब यह पपीते के पौधें नर प्रजाति के होने की बात उजागर होने पर किसानों में खलबली मची है. यह प्रकार तेल्हारा तहसील के अंतर्गत आनेवाले ग्राम चीत्तलवाड़ी का है. किसानों की शिकायत के बाद कृषि विभाग ने खेतों का निरीक्षण करने के बाद इस संदर्भ में मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. 

    चीत्तलवाड़ी की शीला इंगले ने कौशल किसान कोठा (राजस्थान) से पपीते के पौधे 30 रु. की दर से खरीदे थे. रोपण के लगभग तीन महीने बाद, यह पाया गया कि किसान के खेत में 70 से 80 प्रतिशत नर प्रजातियों के पौधें और पपीता वायरस से संक्रमित पौधें थे. संबंधित कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने अस्पष्ट जवाब देकर किसानों के फोन उठाना बंद कर दिया. जिससे इसकी शिकायत किसानों ने कृषि विभाग से की थी.

    जिससे कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और डा.पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ता और अधिकारियों ने 8 जुलाई को किसानों के खेतों में जाकर पपीता के पौधों का निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद किसानों की बातों तथ्य पाकर अधिकारियों ने संबंधित कंपनी पर फौजदारी मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

    इस अवसर पर तेल्हारा तहसील के कृषि अधिकारी मिलिंद वानखड़े, अकोट तहसील कृषि अधिकारी शिंदे, तेल्हारा पंचायत समिति के बीडीओ भारत चव्हाण, उप सरपंच शिवबा मेतकर व किसान हरिकेश इंगले, सचिन इंगले उपस्थित थे. 

    मैंने अपने खेत में आइसबेरी पपीता लगाया, लेकिन यह 3 महीने तक नहीं बढ़ा. इससे मुझे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान हुआ है. इसलिए मैंने कृषि विभाग से इस कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर मेरी मदद करने का अनुरोध किया है.-शीला इंगले, किसान, चीतलवाड़ी