India gave a shock of 4000 crores to China

अमरावती. भाई-बहन के रक्षाबंधन से मार्केट में त्यौहारों का सीजन शुरु हो जाता है. इस दिन हर बहन अपने हाथों पर भाई की कलाई पर सुरक्षा के वादे के साथ राखी बांधती है. जिस तरह प्रतिवर्ष राखियों की विक्री होती थी उसकी तुलना में इस वर्ष कोरोना के चलते 30 से 40 फीसदी विक्री घट चुकी है. शहर के मोचीगली में रक्षाबंधन के 15 दिन पहले से ही राखियों की विक्री आरंभ हो जाती है, लेकिन इस बार तीन दिन बाद रक्षाबंधन का त्यौहार आने के बावजूद भी राखियों की खरीदी के लिए बहनें खरीदी के लिए बाहर नहीं निकल रही है. 

अन्य राज्यों से नहीं पहुंची राखियां
जिले में प्रतिवर्ष प्रतिष्ठान सजाने के लिए अन्य राज्यों से भी राखियों की डिमांड पूर्ण की जाती है. लेकिन इस वर्ष अधिकाशं प्रतिष्टान संचालकों ने बाहरी राज्यों की बजाए यहां तैयार किये जानेवाले लोगों से ही राखियां खरीदी. इतना ही नहीं तो गत वर्ष शेष बची राखियों से भी प्रतिष्ठान सजाये गये. कोरोना ग्रस्तों के आंकडे बढने से महिलाएं मार्केट की भीड में जाने की बजाए आस पडोस की दूकानों से ही खरीदने में भलाई समझ रही है. इसलिए 24 घंटे जाम रहने वाली जमील कालोनी इन दिनों सुनसान पडी है. 

दो दिन बंद, आज ही खरीदी 
राखियों के लिए मार्केट में भीड न हो और सोशल डिस्टसिंग का पालन हो इसलिए गली मोहल्ले में भी बेरोजगार हुए लोगों ने गली मोहल्लों में प्रतिष्ठान आरंभ कर दिया है. शनिवार व रविवार को लाकडाउन के चलते मार्केट बंद है इसलिए कई दिनों बाद भीड 10 प्रतिशत बढी दिखी. सोमवार को रक्षा बंधन रहने से राखियां खरीदने में महिलाएं बाहर निकल पडी थी.  हालांकि इस वर्ष 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक राखियां मार्केट में उपलब्ध है. इस वर्ष नयी राखी की ओर अधिक आकर्षित होने की बजाए लुंबा राखियों को ही अधिक पसंद किया गया. शाम 7 बजे तक ही मार्केट रहने से अधिकांश महिलाओं ने खरीदी जल्दी निपटाई. 

खर्च में कटौती
गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष राखियों की विक्री कम होने के साथ साथ बहनों ने खर्चे में भी कटौती की है. सर्वाधिक मंहगी राखी खरीदने की बजाए आर्थिक तंगी के चलते 50 की बजाए 20 रुपये की राखी पर ही संतोष माना जा रहा है. मार्केट में गिफ्ट के लिए भी एक से बढकर एक वैरायटी उपलब्ध है. बडे बडे प्रतिष्ठानों में रक्षाबंधन के पूर्व ही साडियों समेत ड्रेस व  कपडों की सेल लगायी गई. लेकिन उसे भी जिस तरह चाहिए उस तरह का प्रतिसाद नहीं मिला. 

कोरोना से मार खा रहे त्यौहार
मार्केट में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष भीड काफी कम है. ग्राहक घबराया हुआ रहने से और व्यापारी नियमों के साथ बंधे रहने से त्यौहार भी मार खा रहे है. त्यौहारों का मचा किरकिरा हो रहा है. डिमांड है लेकिन लाकडाउन के कारण नया कुछ भी उपलब्ध नहीं करा पाये. जिसका सीधा असर मार्केट पर हो रहा है. समय औैर नियमों के साथ बंधे रहने से परेशान है. 

– प्रकाश उधवानी, संचालक अमर ज्वेलरी