Villagers wandering for water

    धारणी. मेलघाट में शासन-प्रशासन अभी तक सभी सुविधा उपलब्ध कराने के दावे कर रहा था. प्रत्येक क्षेत्र में संबंधित विभाग ने केवल कागजी खानापूर्ति कर ऑल इज वेल दिखाया. करोड़ों रुपए की निधि व्यर्थ खर्च कर दी. यह बात बबईढाणा गांव से स्पष्ट होती है.

    धारणी मुख्यालय से 20 किमी दूरी पर स्थित बबईढाणा के लोग जर्जर हुए कुएं से हरे रंग का पानी पीने के लिए मजबूर है. बावजूद इसके पंचायत समिति प्रशासन और जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने इसकी दखल नहीं ली. इतना ही नहीं तो गांव की स्थिति को देखकर प्रशासन की भी पोल खुल गई है. 

    प्रशासन की खुली पोल 

    धारणी पंचायत समिति अंतर्गत आने वाले राणापिसा ग्राम पंचायत के बबईढाणा में कई महीनों से पेयजल के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है. इतना ही नहीं तो गांव शिवार ग्रामपंचायत प्रशासन द्वारा खोदे गए कच्चे कुएं से हरे रंग का गंदा पानी गांववासी भर रहे हैं. गैर जिम्मेदार जिला परिषद ग्रामीण जलापूर्ति विभाग धारणी की ओर से बबईढाणा गांववासियों की शिकायतों की ओर हमेशा अनदेखी की गई.

    वहीं दूसरी ओर गांव के बाहर एक खेत में स्थित बोरवेल सिंटेक्स टंकी में पानी लिया जाता है. उसमें से नागरिकों को पानी भरने के लिए कहा जाता है, ऐसी परिस्थिति में जिला ग्रामीण जलापूर्ति उपविभाग पूरी तरह से पोल खुल गई है. धारणी उपविभाग जलकिल्लत दूर करने के दावे कर रही थी, लेकिन बबईढाणा की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की यह पोल खुल गई.