कोरोना के साए में नवरात्रि की तैयारियां, घर घर होगी घटस्थापना

अमरावती. कोरोना महामारी ने इस वर्ष सभी त्यौहारों को ग्रहण लगाया है. लेकिन बीते दो सप्ताह में धीमी हुई संक्रमण रफ्तार ने नवरात्रि उत्सव को लेकर नया उत्साह संचारीत किया है. जिसके चलते शहर समेत जिले में कोरोना के साए में नवरात्रौत्सव की तैयारियां जोर शोर से शुरु है. जहां सार्वजनिक मंडलों ने पंडालों खडा करना शुरु किया है, वहीं घर घर में होनेवाली घटस्थापना के लिए तैयारी शुरु हो गई है. लेकिन सर्दियों के दिनों में कोरोना की दूसरी लहर की संभावना के मद्देनजर सरकार ने घरेलु तथा सार्वजनिक दुर्गा स्थापना के लिए गाईड लाईन जारी की है.

जनजागृति पर दे जोर

शुक्रवार 16 अक्टूबर को पुरुषोत्तम मास समाप्त होते ही 17 अक्टूबर से घट स्थापना होगी. सरकार ने लोगों से आग्रह किया कि वे कोरोना वायरस महामारी के चलते आगामी नवरात्रि एवं दशहरा त्योहार सादगी से मनायें. राज्य सरकार ने साथ ही सामूहिक भागीदारी वाले डांडिया, गरबा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बदले स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविरों का आयोजन करने का सुझाव दिया. सार्वजिनक मंडलों को भी कोविड-19, मलेरिया और डेंगू आदि बीमारियों के बारे में जागरुकता फैलाने का सुझाव सरकार ने दिया है.

शोभायात्रा की इजाजत नहीं

दिशानिर्देशों के अनुसार मंडलों द्वारा स्थापित की जाने वाली मां दुर्गा प्रतिमा की ऊंचाई 4 फुट रखी गई है, जबकि घरों में स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं की ऊंचाई 2 फुट रखी गई है. साथ ही सामान्य समय में होने वाले विसर्जन जुलूस, भीड़भाड़ की इजाजत नहीं दी गई है. इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि श्रद्धालु इस बार धातु की प्रतिमाओं का चयन करें तथा स्थानीय केबल नेटवर्क, स्ट्रीमिंग एवं सोशल मीडिया के जरिये डिजिटल दर्शन करें. पंडाल में थर्मल स्क्रीनिंग का इंतजाम करें सफाई पर अधिक ध्यान दें. उसी प्रकार दर्शन आकांक्षी श्रद्धालुओं को सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए.

दर्शकों को आमंत्रीत ना करें

सरकार ने कहा कि विसर्जन नगर निगम, हाउजिंग सोसाइटी, जनप्रतिनिधियों और एनजीओ की मदद से बनाये गए कृत्रिम तालाबों में किया जाना चाहिए. वहीं घर के स्तर पर पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाना चाहिए. इसमें कहा गया है कि निषिद्ध क्षेत्रों से घरों की और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित प्रतिमाओं के विसर्जन की अनुमति नहीं है. दिशानिर्देशों के अनुसार पारंपरिक दशहरा कार्यक्रम में रावण का पुतला दहन सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए बिना दर्शकों के और प्रतिकात्मक रूप में किया जाना चाहिए. सरकार ने कहा, दर्शकों को आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए. आयोजकों को फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल करते हुए सीधे प्रसारण का इंतजाम करना चाहिए.’