सुप्रसिद्ध बहिरम मेला रद्द, वर्षों से चल रही परंपरा खंडित

चांदूर बाजार: महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में प्रसिद्ध व राज्य में सबसे लंबे समय तक चलने वाला चांदूर बाजार तहसील का बहिरम मेला इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण रद्द किया गया है. हर वर्ष 20 दिसंबर से मेले का आरंभ होता है, जहां पूरे राज्य से श्रद्धालु मेले का आनंद लूटने पहुंचते हैं. लेकिन इस वर्ष श्रद्धालुओं को निराश होना पड़ेगा.

सातपुडा पर्वत की गोद में बसा बहिरम बाबा का भव्य मंदिर है, जो करीब 125 फीट ऊंचाई पर बना हुआ है. मंदिर की मूर्तियां, वज़नी घंटा आकर्षण का केंद्र बिंदु है. पंढरपुर की तर्ज़ पर यहां रिंगण समारोह का भी आयोजन हर वर्ष किया जाता है. लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते इस मेले को रद्द कर कड़े दिशा-निर्देश प्रशासन की ओर से जारी किए गए हैं.

व्यापार पर संकट

राज्य में सबसे लंबे समय तक चलने वाले इस मेले में करीब 600 से 700 दुकानें हर वर्ष लगाई जाती है. जहां हर तरह का सामान उपलब्ध होता है. सब्जियों की दुकान से लेकर खाने की होटल, बच्चों के खेलने का सामान, घरेलू सामान सजावट के सामान, मिट्टी के बर्तन व पुरातन दौर के चीजें भी यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती है. करीब 40 दिनों तक चलने वाले इस मेले में मनोरंजन के लिए झूले, मौत का कुआं आदि हर तरह की सेवा सुविधा उपलब्ध होती है.

वहीं 600 से 700 दुकानों की नीलामी से लाखों रुपए का राजस्व भी सरकारी खज़ाने में जमा होता है. पिछले वर्ष 660 दुकानों की नीलामी से प्रशासन को 12 लाख 30 हज़ार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था. वहीं कई परिवारों का 40 दिन के चलने वाले मेले की कमाई से गुजर बसर चलता है, लेकिन यह परिवार इस वर्ष मेले के रद्द होने से प्रभावित होंगे. कई वर्षों से चले आ रही मेले की परंपरा इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते खंडित होंगी और भक्तों को निराश होना पड़ेगा.

कई नेता,अभिनेता लगा चुके हाजिरी

विदर्भ में यह सबसे लंबे समय तक चलने वाला मेला है, जो पूरे महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है. जहां महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के भी नागरिक मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं. वही यहां दिग्गज नेता, अभिनेता जैसे शरद पवार, मकरंद अनासपुरे, मुकेश खन्ना हाजरी लगा चुके हैं. खाने के शौकीन लोग बहिरम मेले में मिट्टी से तैयार की गई हंडी में बना मटन का स्वाद चखने के लिए भी अधिकतर पहुंचते हैं. कहा जाता है कि यहां की मन करना के पानी से बना मटन का कुछ अलग ही स्वाद होता है. खासकर अवकाश के दिनों में यहां अधिक भीड़ नज़र आती है. दूरदराज से लोग मटन हंडी, रोडगे, ज्वार की रोटी का मज़ा चकने पहुंचते हैं.

आर्थिक संकट टालने उचित मार्ग निकाले

बहिरम मेले में होटेल लगाकर होटेल में काम करने वाले 10 परिवारों का गुज़र बसर चलता था. लॉकडाउन की मार झेल रहे हम होटेल व्यवसायियों और काम करने वाले मजदूरों पर मेला रद्द के आदेश से फिर संकट आ चुका है. प्रशासन आर्थिक संकट को टालने उचित मार्ग निकालें.- निलेश पाटिल,होटेल संचालक, शिरजगांव कसबा