बिल्डर व प्रशासन की मिलिभगत, महापौर ने विपक्षों के मनसूबों पर फेरा पानी

अमरावती. अमरावती के किसान सहकारी जिनिंग प्रेसिंग के मनपा के कब्जें में भूखंड प्रकरण न्यायप्रविष्ठ होते हुए भी बिल्डर किसान संचालक व महानगरपालिका के अधिकारियों ने संगनमत कर वापस करने के संदिग्ध व्यवहार पर शनिवार को अदालत में स्वयं उपस्थित रहकर महापौर चेतन गांवडे ने विरोधियों के मनसूबों पर पानी फेर दिया. 

22 को फिर सुनवाई 

18 सितंबर को हुई आमसभा में किसान जिनिंग संस्था के अमरावती मनपा के कब्जे में रहे 20 करोड रुपयों के भूखंड छोडने आयुक्त के आदेश से सहाय्यक संचालक नगररचना ने 15 मई को रिलीज डिड सभागृह प्रस्ताव क्रमांक 41 व 42 अन्वये रद्द किया था. यह मामला न्यायप्रविष्ठ होने से वह मामला आज भी अदालत में चल रहा है. शनिवार को न्याय. कोठारी ने एड. वैष्णव की दलिलों को ग्राह्य मानते हुए बिना शर्त विड्राल की अनुमति देकर अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को तय की है. जिससे इस मामले में बिल्डर व प्रशासन की मिलिभगत होने संदेह निर्माण हो रहा है. 

महापौर को अंधेरे में रखने का प्रयास

महानगरपालिका के प्रस्ताव पर अदालत प्रकरण में शपथ पत्र दाखिल करने के संदर्भ में महापौर ने विधि अधिकारी को निर्देश दिये थे. विधि अधिकारी ने भी वैसी सूचना दी. इस दावे को लेकर अदालत में सुनवाई रहने से शपथपत्र दाखिल करने के संबंध में कार्यवाही पूर्ण कर उसकी जानकारी देने का महापौर ने निगमायुक्त को दिया था. बावजूद इसके महापौर को जानकारी नहीं दिये जाने से इस मामले में उन्हें अंधेरे में रखे जाने का संदेह निर्माण होते ही महापौर ने एड. श्रेयस वैष्णव को सभागृह की ओर से उपस्थित रहने की सूचना दी. इतना ही नहीं तो महापौर स्वयं तथा पक्षनेता भी अदालत में उपस्थित हुए. 

प्रशासन का वकील भी नहीं 

अदालत में जब महानगरपालिका के वकील उपस्थित न देखकर बिल्डर व प्रशासन में मिलिभगत होने का संदेह निर्माण हुआ. सोसायटी की ओर से भी कोर्ट के पहले नतीजे पर विड्राल लेने की शर्त सोसायटी की ओर से रखी गयी. जिस पर अदालत ने भी बगैर किसी शर्त के विड्राल करने के आदेश दिये. अब देखना यह है कि 22 अक्टूबर को प्रशासन व सोसायटी की ओर से क्या पक्ष रखा जाता है. लेकिन महापौर के निर्देशों के बाद भी मनपा का प्रस्ताव दाखिल नहीं होना, पूराने वकील को बदलना, जानकारी महापौर के नहीं देना, आयुक्त को पत्र देने के बावजूद भी उन्हें जानकारी नहीं देने से संदेह निर्माण हो संभावना व्यक्त की जा रही है. 

अदालत पर विश्वास

यह मामला न्याय प्रविष्ठ होने के कारण प्रशासन की भूमिका गलत है. आमसभा में यह फैसला लिया बावजूद इसके जानकारी नहीं दी जा रही है. इसलिए अदालत में सुनवाई के लिए पहुंचे थे. अदालत पर विश्वास है जो होगा वह सही होगा. 

चेतन गांवडे, महापौर