भाजपा विधायक अतुल सावे का आरोप, ठाकरे सरकार की असफलता को छुपा रहे छगन भुजबल और विजय वडेट्टीवार

    औरंगाबाद. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बार-बार समयावधि बढ़ाकर देने के बावजूद ओबीसी समाज (OBC Society) का इम्पिरिकल डाटा उद्धव ठाकरे सरकार (Uddhav Thackeray Government) पेश नहीं कर पाई। जिसके चलतेे ओबीसी समाज का राजनीतिक आरक्षण रद्द हुआ है।  सुप्रीम कोर्ट ने जनगणना  द्वारा जमा की गई जानकारी कभी मांगी ही नहीं है। अपनी  असफलता को छुपाने के लिए ठाकरे सरकार के मंत्री छगन भुजबल और विजय वडेट्टीवार झूठ का पुलिंदा रचे हुए है। यह आरोप औरंगाबाद पूर्व के भाजपा विधायक अतुल सावे ने लगाया है।

    ओबीसी समाज के आरक्षण  रद्द को लेकर भुजबल व वडेट्टीवार द्वारा दिए  जा रहे बयानों की खिल्ली उडाते हुए अतुल सावे ने कहा कि ओबीसी समाज इन दोनों मंत्रियों के झांसों में नहीं आएगा। सावे ने बताया कि ओबीसी प्रवर्ग की जनगणना द्वारा जमा की गई जानकारी मोदी सरकार के पास है। यह जानकारी मोदी सरकार न देने के कारण महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय संस्था के चुनावों में ओबीसी समाज का आरक्षण  होने का ढोल भुजबल और वडेट्टीवार द्वारा पीटा जा रहा है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कृष्णमूर्ति की  याचिका पर दिए हुए परिणाम के परिच्छेद 48 के निष्कर्ष-3 परिच्छेद 48/कन्क्लुजन 3 में स्पष्ट रुप से इम्पिरिकल डाटा  यह शब्द इस्तेमाल किया है, सेन्सस यानी जनगणना शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। अपनी  असफलता को छुपाने के लिए आघाडी सरकार के मंत्री सुप्रीम कोर्ट के नाम पर ओबीसी समाज में भ्रम पैदा कर रहे है।   

    फडणवीस सरकार ने जारी किया था अध्यादेश

    विधायक सावे ने बताया कि ओबीसी समाज का आरक्षण बचाने के लिए फडणवीस सरकार ने 31 जुलाई 2019 को अध्यादेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह अध्यादेश मान्य भी किया था।  बाद में राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अध्यादेश को कानून में बदलने के लिए कुछ जरुरी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करना जरुरी था। परंतु, ठाकरे सरकार की लापरवाही के कारण यह अध्यादेश कानून में न बदल पाने का आरोप विधायक अतुल सावे ने लगाया। सावे ने बताया कि दिसंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से ओबीसी समाज का इम्पिरिकल डाटा मांगा था। पिछड़ा आयोग स्थापित कर यह डाटा जमा करने की प्रक्रिया शुरु करने में आघाडी सरकार ने लापरवाही दिखाई है। सत्ता आने के 15 महीनों  बाद भी आघाडी सरकार पिछड़ा आयोग स्थापित नहीं कर पाई। सावे ने आरोप लगाया कि ओबीसी समाज को आरक्षण से दूर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में  इम्पिरिकल डाटा पेश करने में ठाकरे सरकार ने जानबूझकर लापरवाही दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण रद्द करने के बाद भी ठाकरे सरकार हाथ पर हाथ धरे बैैठी है। अंत में सावे ने चेताया कि सरकार स्थानीय निकाय संस्था के चुनाव में ओबीसी समाज को आरक्षण दिलाने के लिए तत्काल पहल करें।  वरना,सरकार को ओबीसी समाज के आक्रोश  का सामना  करना पड़ सकता है।