जनप्रतिनिधियों के घरों के सामने ढोल बजाओ आंदोलन

  • मराठा क्रांति ठोक मोर्चा की बैठक में निर्णय

औरंगाबाद. राज्य सरकार द्वारा मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरी में आरक्षण देने को लिए गए निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों वाली बेंच ने स्थगिती दी है. इससे मराठा समुदाय में रोष है. ऐसे में मराठा क्रांति ठोक मोर्चा के बैनर तले सरकार के खिलाफ आंदोलन करने का निर्णय मराठा समुदाय के विविध संगठनाओं की शुक्रवार शाम औरंगाबाद में हुई राज्यस्तरीय बैठक में लिया गया. इस निर्णय के तहत सोमवार से राज्य भर के सभी दलों के सांसद और विधायकों के घरों के सामने ढोल बजाओं आंदोलन किया जाएगा.

मानसून अधिवेशन में उठाया जाएगा मुद्दा

संगठन के समन्वयक रमेश केरे पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार मराठा समुदाय के साथ खडा रहे. सरकार की भूमिका हम सबको समझना होगा. तब तक  मराठा समुदाय के युवक कोई भी सख्त कदम न उठाए. बैठक में उपस्थित किशोर चव्हाण ने कहा कि केन्द्र का मानूसन अधिवेशन आरंभ होनेवाला है. लोकसभा तथा राज्य सभा में इस पर चर्चा होना अपेक्षित है. मराठा समुदाय के युवक आत्महत्या ना करें. राज्य, केन्द्र और न्यायालय ऐसे 3 पर्याय मराठा क्रांति ठोक मोर्चा के सामने है. आरक्षण को न्यायालय से अंतरित स्थगिति मिली इसका मतलब यह नहीं हैं कि हमारा सब कुछ खत्म हो चुका है. आरक्षण का मामला 5 जजों की खंडपीठ के समक्ष वर्ग करते समय सिर्फ मराठा आरक्षण को स्थगिति देने का तत्काल निर्णय लिया गया. ऐसे में जन प्रतिनिधियों को जगाने के लिए सोमवार से राज्य के सभी दलों के सांसद और विधायकों के घरों के सामने ढोल बजाओ आंदेालन करने का निर्णय लिए जाने की जानकारी समन्वयक रमेश केरे पाटिल ने दी. उन्होंने बताया कि आरक्षण लेने के लिए मराठा समाज एकजूट हुआ था, उसी तरह आज भी मराठा समाज एकजूट है. 

मराठा समाज को ओबीसी में शामिल करें

प्रा. शिवानंद भानुसे ने कहा कि गायकवाड आयोग ने मराठा समाज को ओबीसी पात्र ठहराया. ऐसे में राज्य सरकार ने अब एक दिवसीय विशेष अधिवेशन लेकर वैसा अध्यादेश निकालकर मराठा समाज को ओबीसी में शामिल करें. यह राज्य सरकार के हाथ में है. राजेन्द्र दाते पाटिल ने कहा कि न्यायालय द्वारा मराठा आरक्षण को लगायी गई स्थगिति वापस लेने के लिए राज्य सरकार ने अब तत्काल विनंती आवेदन करने की जरुरत है. समाज के युवा कल के भविष्य है. ऐसे में कोई भी युवा आत्महत्या करने का प्रयास ना करें.