अपने वाहन में कोरोना बाधित बेटे को घाटी अस्पताल पहुंचाकर करवाया मां का अंतिम दर्शन

–  मनपा के डॉ. रितेश सकलेचा ने दिखायी इन्सानियत  

औरंगाबाद. कोरोना से जान गंवा चुकी मां के अंतिम दर्शन कराने की इच्छा बीड बाईपास रोड़ पर स्थित एमआईटी कोविड सेंटर में भर्ती कोरोना बाधित बेटे ने वहां कार्यरत डॉ. रितेश सकलेचा के सामने जतायी. कोरोना महामारी के इस संकट में डॉ. सकलेचा ने इन्सानियत का परिचय देते हुए बेटे की इच्छा पूरी करने उसे अपनी कार  में घाटी अस्पताल ले गए और बेटे को मां का अंतिम दर्शन करवाया.

दो दिन पूर्व घाटी अस्पताल में कोरोना बाधित महिला की मौत हो गई थी. उस महिला का पार्थिव उसके रिश्तेदारों को सौंपना जरुरी था. प्रशासन ने उक्त महिला के रिश्तेदारों की जानकारी हासिल करने पर पता चला कि इस महिला के एक बेटे की 3 दिन पूर्व ही कोरोना से मौत हो गई थी, जबकि दूसरा बेटा कोरोना बाधित होने से वह एमआईटी कोविड सेंटर में भर्ती है. इसी दरमियान बेटे को अपनी मां की मौत होने  की जानकारी मिलने पर उसने कोविड सेंटर में कार्यरत डॉ. सकलेचा से मां के अंतिम दर्शन कराने की इच्छा जतायी. मां के अंतिम दर्शन के लिए तडप रहे कोरोना पॉजिटिव बेटे को अस्पताल कैसे ले जाए? इसको लेकर डॉ. सकलेचा सक्ते में थे.  उधर, सुबह के समय मनपा के सभी एम्बुलेंस कोरोना पॉजिटिव मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में व्यस्त थे.  बेटे की तड़प देखकर डॉ. सकलेचा के मन में इन्सानियत जाग उठी.

अपनी कार में कोरोना बाधित बेटे को लेकर पहुंचे घाटी अस्पताल

कोरोना बाधित बेटे को अपनी मां के अंतिम दर्शन कराने के लिए एम्बुलेंस न मिलने से बेचैन डॉ. सकलेचा ने उस मरीज को घाटी अस्पताल पहुंचाने का बीडा उठाया. इसके लिए उन्होंने सबसे पहले  एमआईटी कोविड सेंटर की नोडल ऑफिसर तलत काजी व मनपा की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नीता पाडलकर से चर्चा की. शहर में कोरोना के बढ़ते कहर के बीच मां के अंतिम दर्शन करने के लिए बेचैन बेटे को घाटी अस्पताल पहुंचाने के लिए विशेष उपाय भी करना जरुरी था.  ऐसे में दोनों ने पीपीई किट परिधान किया. सैनिटाईजर का इस्तेमाल किया. डॉक्टर व मरीज दोनों वाहन में अलग-अलग दिशा में बैठकर घाटी अस्पताल पहुंचे. वहां कोरोना बाधित बेटे ने महामारी से  जान गंवा चुकी अपने मां के डेढ़ से दो घंटे ठहरकर अंतिम दर्शन लिए.

डॉक्टर के सकारात्मक विचार से बेटे का अंतिम दर्शन

मनपा के सांस्कृतिक अधिकारी संजीव सोनार ने डॉ.  सकलेचा द्वारा दिखायी  इन्सानियत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि डॉक्टर के सकारात्मक विचार के चलते कोरोना बाधित बेटा अपनी मां के अंतिम दर्शन कर पाया. वरना, वह जीवन भर अपनी मां का अंतिम दर्शन न मिलने को लेकर अफसोस करता रहता. सोनार ने कहा कि असल में यदि हर इंसान ने कोरोना मरीज की ओर देखते समय सकारात्मता दिखायी तो उसके  बेहतर परिणाम समाज पर हो सकते हैं.