car

नयी दिल्ली.  वाहनों के लिये कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों के संगठन एकमा ने नये नियमन के मामले में राहत की मांग की है। साथ ही नये नियम लागू करने को लेकर एक दीर्घकालीन व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है ताकि उद्योग उस बदलाव के लिये स्वयं को तैयार कर सके जिसमें भारी निवेश की जरूरत है।

देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला उद्योग वाहन क्षेत्र में पहले से जारी नरमी और कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने को लेकर जूझ रहा है। इसके कारण आपूर्ति व्यवस्था की समस्या सामने आयी है और उत्पादकता प्रभावित हुई है।

ऑटोमोटिव कम्पोनेंट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एकमा) के अध्यक्ष दीपक जैन ने पीटीआई-भाषा से बातचीत मे कहा कि चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल ने उद्योग के लिये नये नियमन को लेकर निवेश की क्षमता को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘बीएस-4 से बीएस-6 में जाने के दौरान उद्योग ने करीब 80,000 करोड़ रुपये निवेश किया। इसमें से 40 से 50 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों के लिये उपकरण बनाने वाले उद्योग की है।”

जैन ने कहा कि आने वाले समय में नये नियम आते रहेंगे। इसीलिए हमने इस मामले में राहत की मांग की है क्योंकि उद्योग को जो अधिक महत्वपूर्ण नियमन हैं, उसके लिये स्वयं को तैयार करना है। करीब 50 लाख लोगों को रोजगार देने वाला उद्योग ने कहा कि उसने नये कायदा-कानून के क्रियान्वयन को लेकर दीर्घकालीन (10 से 15 साल) व्यवस्था की भी मांग की है ताकि वे जरूरी बदलाव को लेकर स्वयं को तैयार कर सके। जैन ने कहा, ‘‘वाहनों के लिये कल पुर्जा बनाने वाले उद्योग के लिये निवेश क्षमता घटी है।

इसका कारण बाजार में लंबे समय से जारी नरमी और कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्थिति है।” उन्होंने कहा कि मौजूदा उतार-चढ़ाव वाले हालात में क्षेत्र के लिये स्थिरता लाना एक महत्वपूर्ण पहलू है। जैन ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि बुनियादी रूप में हमें स्थिरता की जरूरत है। काफी उठा-पटक हो चुका है। हमें उद्योग को स्थिर करने और उसके बाद भविष्य के लिये क्षेत्र को सतत रूप से मजबूत बनाने के लिये कदमों पर गौर करने की जरूरत है। यह केवल सभी संबंधित पक्षों के बीच मजबूत सहयोग से ही हो सकता है।”

जैन ने कहा कि मांग को गति देने के साथ-साथ देश में आपूर्ति व्यवस्था सुनुश्चित करना महत्वपूर्ण है। यह वाहन उद्योग के दीर्घकालीन मजबूती के लिये जरूरी है।” उन्होंने कहा, ‘‘आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है। हम जो थोड़ा-बहुत भी मांग है, उसे पूरा नहीं कर पा रहे। सरकर को इसे समग्र रूप से देखने की जरूरत है और मांग एवं आपूर्ति व्यवस्था में संतुलन बनाने की जरूरत है।

यह देश में वाहन क्षेत्र के लिये जरूरी है।” जैन ने कहा कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना है तो वाहन क्षेत्र को अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि सियाम (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स), एकमा, फाडा (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) जैसे संगठनों को और सरकार को एक साथ आकर काम करने की जरूरत है ताकि विभिन्न कल-पुर्जों के मामले में आत्मनिर्भर होने जैसे भविष्य के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।