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  • किसानों को देना पड़ रहा है पूरी रात पहरा

भंडारा. अन्नदाता किसानों का गम कभी कम नहीं हो रहा. वह किसी न किसी कारण परेशान रहता है. कभी गीला अकाल, कभी सूखा अकाल तो कभी कर्ज तो कभी गोदाम की किल्लत. इन सभी परेशानियों से रास्ता निकाल कर किसान हर साल रबी-खरीफ बुआई के लिए तैयार होता है तो हर बार उसे अपने खेतों की निगरानी भी करनी पड़ती है. यह निगरानी उसे जंगली जानवरों के कारण करनी पड़ती है. अभी किसानों ने खरीफ की फसल खेतों में लगानी शुरू ही की है. किसानों को इन दिनों अपने खेतों की ओर ज्यादा ध्यान देना पड़ा रहा क्योंकि जंगली जानवर किसानों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं.

वन्यप्राणियों से खतरा

खेतों में लगी फसलें अंकुरित होते ही उसमें हिरन, जंगली सुअर, नीलगाय, बंदरों की झुंड तो हमला तो करते ही है.  साथ ही पक्षियों तथा विभिन्न कीटकों द्वारा भी फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. फसलों को जंगली जानवरों द्वारा नष्ट किए जाने की स्थिति में किसानों को फिर बुआई करनी पड़ती है. कभी वर्षा न होने के कारण खराब हुई फसलों के स्थान पर किसानों को फिर से बुआई करनी पड़ती है. 

एक तरफ महंगे बीज तो दूसरी ओर खेतों में अंकुरित होती फसलों की बर्बादी से किसानों को दोहरा नुकसान सहन करना पड़ रहा है. वर्षा काल में वैसे भी फसलों की ओर विशेष रूप से नजर रखी जाती है. किसानों को सदैव यह यह डर सताता रहता है कि कहीं उसकी फसलें नष्ट न हो जाएं. अपनी फसलों के बचाने के लिए किसानों को रात भर अपने खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है.