धारगांव में शराब बंदी के लिए रास्तों पर उतरीं महिलाएं

  • .देशी शराब की 23 बोतलें जप्त
  • .प्रतिबंध के बावजूद छूपे मार्ग से शराब बिक्री का काला-कारनामा जारी

भंडारा (का). तहसील के धारगांव में पिछले आठ वर्षों से शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है. लेकिन शराब पीने वाले येन-केन प्रकारेण शराब प्राप्त कर रहे हैं. धारगांव में गुप्त मार्ग से शराब आने का सिलसिला कोरोना काल में भी जारी रहा. प्रतिबंध के बावजूद गांव में शराब आने तथा उससे घर का पुरुष वर्ग व्यसन का शिकार हो रहा था. शराब की लत से घर-घर में होने वाले झगड़ों से परेशान महिलाओं ने रास्ते पर उतर कर देशी शराब बिक्री के खिलाफ नारेबाजी की. इन महिलाओं ने शराब विक्रेताओं से शराब विक्रेताओं से शराब की 23 बोतलें खरीदी और उन्हें पुलिस के हवाले किया. जो काम पुलिस नहीं कर सकी, उसे महिलाओं ने कर दिखाया. महिलाओं के इस कार्य की सर्वत्र सराहना की जा रही है.

व्यसन मुक्ति कल्याणकारी महिला समिति की ओर से आठ वर्ष पहले धारगांव में शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था. शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगने के बाद गांव में शांति तथा सुव्यवस्था की स्थापना हुई, लेकिन कोरोना महामारी के कारण की गई तालाबंदी के बाद गांव में शराब बिक्री का जो दौर शुरु हुआ, वह अभी-भी जारी है. धारगांव में शराब की लत से कई परिवार बर्बाद हो गए. गांव के युवक शराब के अधीन हो गए. खराब के कारण यहां के अथिकांश युवकों को भविष्य पूरी तरह से समाप्त हो गया है.

कोरोना महामारी के फैलाव से पहले धारगांव में जिस तरह का अमन चैन था, वैसा अमन-चैन अब गांव में नहीं रह गया है. गांव के युवकों में शराब की तल बढने से घर-घर में तनाव का वातावरण बना हुआ है, शराब की लत आपसी रिश्तों में खटास ला रही है. इस चित्र को बदलने के लिए व्यसनमुक्ति कल्याणकारी महिला समिति की पदाधिकारियों ने एक बैठक का आयोजन किया. इस बैठक में शराब विक्रेताओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया गया. बैठक में शराब विक्रेताओं से दो-दो हाथ करने का निर्णय लिया गया. पुलिस को इस बारे में जानकारी भी दी गई, बैठक में शामिल महिलाओं ने गांव में शराब बिक्री करने वालों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सभी ने साथ आने का संकल्प लिया. बैठक में व्यसन मुक्ति कल्याणकारी महिला समिति की उपाध्यक्ष उषा गिरीपुंजे, गौरी वंजारी, ममता नंदेश्वर, पुर्णिमा  नंदेश्वर, राधा मरस्कोल्हे, शंकुतला ठाकरे, वनिता गोमासे, लता धुर्वे, मंदा मेश्राम, अनुसुया बडोले, फरीदा पठान, उषा वरकडे, चंद्रकला मानापुरे, कल्पना वरकड़े, सत्यभामा कोराम, तुरजा बावणे, हिरांगना मानकर, वंदना कोटांगले, छाया नावरे, गीता कोराम ने शराब विक्रेताओं के विरोध में स्वर बुलंद किया.