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    • -स्कूल शुभारंभ की हलचलें तेज

    पालांदूर.  कोरोना के प्रकोप के चलते बच्चों के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले स्कूल कई दिनों से बंद हैं. स्कूल प्रांगण बच्चों की हंसी से सराबोर था, लेकिन कोरोना की वजह से स्कूल शुरू न होने से सभी बच्चों के चेहरे पर से खुशियां चली गई थी. एक बार फिर स्कूल शुरू होने की हलचलें शुरू हो गई है.  सरकार ने 15 अप्रैल से बंद पड़े स्कूल को 15 जुलाई से चरणबद्ध तरीके से शुरू करने का फैसला किया है. सरकार के इस फैसले का अभिभावकों और शिक्षकों ने स्वागत किया है.

    समिति का हुआ गठन

     पिछले शैक्षणिक वर्ष में कोरोना की दूसरी लहर के कारण स्कूल 15 अप्रैल से बंद था. समय के साथ लॉकडाउन और अन्य उपायों ने राज्य में कोरोना संक्रमण को कम किया है. सरकार ने नियमों और शर्तों के अधीन 15   जुलाई  से स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया गया है.  ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत अपने अधिकार क्षेत्र के तहत स्कूल में कक्षा आठवीं से बारहवीं तक शुरू करने के बारे में अभिभावकों के साथ चर्चा कर रही है.  इसके लिए सरकार ने सरपंच की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत स्तर पर कमेटी बनाने का आदेश दिया है. इस समिति में सरपंच, पटवारी, ग्रामसेवक, प्रधानाध्यापक, केंद्र प्रमुख, चिकित्सा अधिकारी और स्कूल व्यवस्थापन  समिति अध्यक्ष शामिल   होंगे.

    गांव में एक भी कोरोना रोगी नहीं होना चाहिए

     स्कूल शुरू करने से कम से कम एक महीने पहले संबंधित गांवों में कोरोना का एक भी रोगी  नहीं पाया गया हो.  छात्रों के अभिभावकों को स्कूल परिसर में प्रवेश न करने की सलाह दी जाती है, ताकि स्कूल की भीड़ से बचा जा सके.  स्कूल शुरू होने पर बच्चों को चरणों में स्कूल बुलाया जाएगा.  कोविड से संबंधित सभी नियमों का कड़ाई से पालन कर ही स्कूल शुरू किया जा सकता है.  स्कूल शुरू होने पर स्कूल के शिक्षकों को उन्हीं गांवों में रहना होगा या शिक्षक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का उपयोग नहीं कर पाएंगे.

     फैसले का स्वागत

    पिछले दो वर्षों से कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद होने से छात्रों का काफी नुकसान हो गया है. छात्रों को यह भी नहीं पता कि मैं अब कौन सी कक्षा में पढ़ रहा हूं. ऑनलाइन पढ़ाई ग्रामीण क्षेत्र में मुश्किल ही है, क्योंकि नेटवर्क की समस्या हमेशा रहती है और हर अभिभावक के पास मोबाइल रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं रह सकती, इसलिए 15 जुलाई से अगर स्कूल चालू होती है, बच्चों के लिए अच्छी बात है और यह निर्णय शासन ने अच्छा लिया है.

     – उमेश मदनकर (अभिभावक)