पूर्व उर्जामंत्री बावनकुले का आरोप, “श्रेयवाद में लटकी बिजली माफी”

  • कांग्रेसी मंत्री राऊत का कद छोटा करने की साजिश

भंडारा. जब परिवहन विभाग के कर्मचारियों का वेतन देने के लिए 1000 करोड रु. की जरूरत पडी. अर्थ मंत्री एवं मुख्यमंत्री ने पैसे जारी करने में पल भर की देरी नहीं की. लेकिन अब 95 लाख बिजली ग्राहकों के बील माफ करने के लिए केवल 4000 करोड रु. जारी नहीं किया जा रहा है. दरअसल राकां एवं शिवसेना बिजली बील माफी का श्रेय कांग्रेस खाते से उर्जा मंत्री बने डा. नितिन राऊत को नहीं देना चाहती. श्रेयवाद के चक्कर में गरीब एवं मध्यमवर्गीय बिजली ग्राहकों पर अन्याय करने का आरोप पूर्व उर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने लगाया. वे भंडारा में पत्र परिषद में बोल रहे थे. मंच पर सांसद सुनिल मेंढे, पूर्व विधायक चरण वाघमारे एवं भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप पडोले उपस्थित थे.

पूर्व उर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि उनके कार्यकाल में किसी भी बकायाधारक किसान का कृषि कनेक्शन काटने की घटना नहीं घटी. 50000 करोड रु. बकाया होने के बावजूद महावितरण फायदे में था. इतनी बडी राशी के बकाये का बोज झेलने की क्षमता सरकार में थी. लेकिन अब उल्टा हो रहा है. सरकार ने पहले उर्जामंत्री डा. नितिन राऊत को बिल माफी के बारे में घोषणा करने को कहा. डा. राऊत ने 3 बार फाइल को मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तुत भी किया. लेकिन सरकार अब कह रही है कि बिजली बील भरना ही होगा. ऐसा कर राकां एवं शिवसेना कांग्रेसी नेता डा. नितिन राऊत का कद छोटा करना चाहती है. कांग्रेस को बदनाम करने का षडयंत्र रचा गया है.

जनवरी का आधार गलत

बावनकुले ने महावितरण की कार्यप्रणाली पर हमला चढाते हुए कहा कि जनवरी महीने को आधार मानकर औसत बिल भेजना गलत है. क्योंकि जनवरी में दुकान, कारोबार, जनजीवन सामान्य था. लाकडाऊन मार्च में लगा. ऐसे में स्वाभाविक है कि बिजली खपत जनवरी के बराबर नहीं थी. इसलिए महावितरण को इन औसत बिलों को रद्द करना चाहिए. प्रति माह 100 युनीट तक बील माफ करना चाहिए.

पटोले से मिलेंगे

उर्जा मंत्री बावनकुले ने अपने कार्यकाल की पुरानी याद ताजा करते हुए कहा कि नाना पटोले बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर सडक में बैठे थे. यह नाना पटोले विधानसभा के अध्यक्ष है. बिजली बील के मुद्दे पर उनसे मिलने की बात बावनकुले ने कही.