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  • 148 ग्राम पंचायत चुनाव
  • नामांकन 23 से 30 दिसंबर तक

भंडारा. कार्यकाल समाप्त व कोरोना संकट के कारण चुनाव नहीं हो पाने से प्रशासक नियुक्त जिले के 148 ग्रापं के चुनाव का बिगुल बज चुका है. यह चुनाव यानी बाद की जिप व पंस चुनावों का प्रशिक्षण होगा. इनमें से जय पराजय पर जिप एवं पंस के लिए रणनीति तैयार होगी.

राजनीतिक माहौल गर्म

इस कार्यकाल के दौरान जुलाई से दिसंबर तक भंडारा जिले की 148 ग्रापं की समय सीमा समाप्त हुई. यहां अब प्रशासक है. राज्य चुनाव आयोग चुनाव की घोषणा के साथ ही गांव का राजनीतिक माहौल गर्म होने लगा है. इसमें कोई शक नहीं है कि चुनाव हर गांव में होंगे, लेकिन यह चुनाव अगली जिप एवं पंस चुनाव के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा. भंडारा जिप व 7 पंस समिति के कार्यकाल की समाप्ति के कारण यहां प्रशासक नियुक्त है. यह चुनाव जल्द होने वाला है, लेकिन अब ग्रापं चुनावों की घोषणा से ग्रामीण जनता कैसे आकर्षित होती है, इसका अभ्यास करते हुए राजनीतिक दल इस चुनाव की रणनीति का आकलन करने की तैयारी कर रहे हैं. 

क्या तीनों दल मिलकर लड़ेंगे

राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार के साथ, कांग्रेस, राकांपा व शिवसेना एक साथ चुनाव लड़ेंगे क्या इस तरह की चर्चा शुरू हुई है, लेकिन ग्रापं स्तर पर गुटों की राजनीति हो रही है. इन तीनों दलों के फिलहाल चुनाव में सीधे जाने की संभावना नहीं है, लेकिन राजनीतिक समीकरण पर भी हर कोई निर्भर करेगा. 

निकायों में कांग्रेस राकां का प्रभुत्व

भंडारा जिले की स्थानीय स्वशासन संस्था पर कांग्रेस व राष्ट्रवादियों का वर्चस्व दिखाई देता है. आखिरी बार जिप कांग्रेस एवं राष्ट्रवादियों ने एकजुट होकर सत्ता संभाली. जिले की नप पर भाजपा हावी है, लेकिन ग्रामीण सहकारी समितियों के साथ, ग्रापं पर कांग्रेस व राष्ट्रवादियों का वर्चस्व दिख रहा है. 

क्या ग्रापं चुनाव में आघाड़ी होगी

ग्रापं चुनाव में फिलहाल लीड का कोई संकेत नहीं है. चुनाव स्थानीय पैनल के माध्यम से हो रहे हैं. केवल क्षेत्र या गांव के प्रभावशाली लोग ही इस चुनाव को नियंत्रित करते देखे जाते हैं.