Satyagraha, Education, School Fees
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  • एक आंदोलन शुरू, दूसरे पक्ष ने किया विरोध

भंडारा. शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति द्वारा जिप भवन के सामने शुक्रवार से सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ किया गया. आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र शुल्क अधिनियम 2014 के अनुसार दोषी शालाओं पर कारवाई, उक्त शालाओं पर प्रशासक नियुक्त करने, कार्यरत कर्मचारियों के सभी पदों के लिए नियम के अनुसार मान्यता लेने जैसी मांगों का समावेश है. वहीं दूसरी ओर शालाओं का पक्ष है कि पूरा आंदोलन नकारात्मता से प्रेरित है. कोरोना के दौरान डिजिटल क्लास के माध्यम से पढ़ाई जारी है. इसमें पालकों का सहयोग मिल रहा है. लेकिन चुनिंदा लोग पूर्वग्रह से प्रेरित होकर विरोध के लिए विरोधक की भूमिका निभा रहे है.

नागपुर सिनेट सदस्य प्रवीण उदापुरे द्वारा जारी पत्र विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि आंदोलन को कई संगठनों का समर्थन प्राप्त है. हिंगनघाट में एक स्कूल पर 3.5 करोड रु. की वसूली कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस तर्ज पर भंडारा में भी कारवाई की जानी चाहिए. आंदोलन का नेतृत्व संयोजक नितिन निनावे द्वारा किया जा रहा है.

स्कूल समर्थकों ने रखा पक्ष

उल्लेखनीय है कि कोरोना में जहां सभी स्कूलें बंद है. लेकिन स्कूल में कार्यरत शिक्षक, कार्यालयीन कर्मचारी से लेकर स्कूल का बस ड्राइवर एवं कंडक्टर को अब भी वेतन दिया जा रहा है. स्कूल इमारत के रखरखाव पर भी भारी खर्च होता है. शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन एजुकेशन दे रहे है. ऐसे में “नो स्कूल, नो फिस” का नारा देना पूरी तरह से अनुचित है. फर्जी कहकर स्कूलों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. विशेष रूप से शहर के 4 स्कूलों को निशाना बनाकर आंदोलन करना आश्चर्यजनक है. 

जिला प्रशासन दखल दें

जैसे की आंदोलनकारी सीबीएसई शालाओं का फर्जी बता रहे है, पढ़ाए जा रहे पाठयक्रम को नकली बता रहे है. इस संबंध में शालाओं के खिलाफ सोशल मीडिया का जम कर इस्तेमाल किया जा रहा है. जिससे सामान्य अभिभावक पशोपेश में है. वह सही एवं गलत का फैसला नहीं कर पा रहा है. ऐसे में जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है, उसे सामने आकर वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए.