सुविधाओं को तरस रहे यात्री, वरठी बस स्टैंड से मुंह मोड़ा महामंडल ने

वरठी. जिले के मुख्य रेलवे स्टेशन के रूप में पहचाने जाने वाले वरठी का जिले व अन्य जिलों के यात्रियों के साथ सीधा संपर्क है. रेलवे स्टेशन की हालत बदल गई है. क्लास ‘ए’ रेलवे स्टेशन के रूप में बड़े पैमाने पर यहां सुविधाएं प्रदान की गईं. किंतु आज स्थानीय बस स्थानक की हालत बद से बदत्तर हो गई है. वरठी का बस स्टैंड यह रेलवे स्टेशन की सीमा के भीतर है.

कई वर्षों से बस स्थानक पर एक छोटा शेड बनाया गया है. जिसमें 10 यात्रियों भी मुश्किल बैठ या खड़े नही रह पाते है. बिजली नही होने से रात में यहां अंधेरा रहता है. मैदान में घास व सड़क के गड्ढों के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं देता है. 15,000 से अधिक की आबादी वाले वरठी में बस स्टैंड के नाम पर एक छोटा सा शेड बनाया गया है और सुविधाएं तो यहां नदारद ही है.

इस बस स्टैंड पर आनेवाले आधे से अधिक यात्रियों को बस का इंतजार करने के लिए पास के पानठेले का सहारा लेना पड़ता है. बारिश के दिनों में तो यात्रियों के हाल बेहाल हो जाते है. दिन भर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें व उससे सफर करने वाले सैकड़ों यात्री आगे की यात्रा तय करने के लिए बस स्टैंड का उपयोग करते हैं.

वरठी से भंडारा, मोहाड़ी, तुमसर, भिलेवाड़ा, शहापुर आदि शहरों में शिक्षा के लिए रोजाना कम से कम 500 छात्र व हजारों आम यात्री यहां आते हैं.  नागपुर, गोंदिया जैसे महानगरों में नौकरियों के लिए वरठी व आसपास के अन्य गांवों के साथ उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों की संख्या अधिक है. इसके अनुसार बस स्टैंड पर सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. एसटी महामंडल व जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. 

बिजली, पानी व शौचालय की कमी

जब से बस स्टैंड का निर्माण हुआ है तब से यात्रियों के लिए पीने के पानी व शौचालय की व्यवस्था नहीं है. जिसके कारण यात्रियों, महिलाओं व दूर-दराज से आने वाले छात्रों को परेशानी होती है. कई यात्रियों को खुले में लघुशंका करते देखा जाता है. जिससे बस स्टैंड परिसर में गंदगी फैल रही है. 

खोजना पड़ता है बस स्टैंड

रेल्वे से उतरने वाले यात्री बस स्टैंड को खोजने के लिए गांव का चक्कर लगाते नजर आते हैं. बस स्टैंड पर यात्रियों के आने के बाद भी यह बस स्टैंड है भी या नही, ऐसा सवाल यात्रियों को आता है़ बस स्टैंड में बस स्टैंड के रूप में बड़े अक्षरों में फलक नहीं है. इसके अलावा बस का शेड्यूल नहीं होने से यात्रियों को संदेह होता है कि यह बस स्टैंड है या नहीं.

छात्रों व यात्रियों को हो रही असुविधा

सुरक्षा दृष्टि से सैकड़ों छात्र व यात्री बस से यात्रा करते देखे जाते हैं. किंतु स्कूली बच्चों के शेड्यूल के अनुसार बस नही आने से हर दिन सैकड़ों छात्र अपने गंतव्य पर समय पर नही पहुंच पाते.साथ ही कार्यालयीन कर्मचारियों को भी इसकी परेशानी का सामना करना पड़ता है. 

सुपर बसों को दें स्टॉपेज

वरठी से लेकर भंडारा, मोहाड़ी, तुमसर, भिलेवाड़ा, शहापुर जैसे शहरों में न्यूनतम 500 छात्र व हजारों यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं. सनफ्लैग स्टील कारखाना व जिले के मुख्य रेलवे स्टेशन होने से सुपर बसें यहां नहीं आती हैं, हालांकि वरठी के बस स्टैंड पर सुपर बस की आवश्यकता है. इसे ध्यान में रखते हुए  यहां पर सुपर बसों को स्टॉपेज देने  की मांग की जा रही है.