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  • पुलिस सहायता केंद्र स्वयं असहाय

भंडारा. जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं का प्रमाण कम करने जिले में एकमात्र पुलिस सहायता केंद्र शुरू किया गया है. किंतु ट्राफिक पुलिस सहायता केंद्र में अधिकारियों और कर्मियों के आधे से अधिक पद खाली है. जिससे यातायात पुलिस को अपने कर्तव्यों का पालन करने पुलिस सहायता केंद्र स्वयं ही असहाय बना है. यातायात व्यवस्था पर असर पड़ रहा है. रिक्त पदों को जल्दी से भरने की मांग की जा रही है.

40 अधिकारी व कर्मियों के पदों को मंजूरी

जिले के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सैकड़ों वाहन चलते हैं. कई बार नियमों का पालन करने में लापरवाही बरतने पर लोगों की जान जाती है. कई लोग दिव्यांग हो गए है. इससे उनके परिवार को परेशानी होती है. गृह विभाग ने दुर्घटनाओं पर रोक लगाने पुलिस टीम में एक यातायात शाखा शुरू की है. यातायात शाखा के पास जिले के गड़ेगांव में एकमात्र ट्राफिक पुलिस सहायता केंद्र है. इस केंद्र का अधिकार क्षेत्र पूरे भंडारा जिले में है. गड़ेगांव यातायात पुलिस सहायता केंद्र में 40 अधिकारी व कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए गए है. पुलिस निरीक्षक 1, पुलिस उपनिरीक्षक 2 और सहायक फौजदार, पुलिस कांस्टेबल, पुलिस नाइक, सिपाही के 37 पद है. इनमें से पुलिस उप-निरीक्षक का एक पद और पुलिस कर्मियों के 18 पद भरे गए है. अन्य पद रिक्त है. 

7 वर्षों से नहीं है पुलिस निरीक्षक 

गडेगांव यातायात पुलिस सहायता केंद्र की जिम्मेदारी पुलिस निरीक्षक पर है, फिर भी इस यातायात केंद्र का प्रबंधन 7 वर्षों से बिना पुलिस निरीक्षक के शुरू है. जूनियर रैंक के अधिकारियों के कारण अधीनस्थ कर्मचारियों पर कोई दबाव नहीं. यही कारण है कि यातायात व्यवस्था की धज्जियां उड़ी हुई हैं. 

दुर्घटनाओं में इजाफा

वैनगंगा व इसकी सहायक नदियों में उच्च गुणवत्ता वाली रेत है. निर्माण व्यावसायिकों की ओर से इस रेत की काफी मांग है. घाटों की नीलामी नहीं होने के कारण जिले से रेत का अवैध कारोबार शुरू हो गया है. भारी वाहनों से रेत लदे ओवरलोड के कारण सड़क की हालत बेहाल है. दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है.