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भंडारा (का). जिस तरह से जिले में कई प्रकार की फसलें होती हैं, उसी तरह फलों के मामले भी भंडारा जिला पीछे नहीं है. फलों का राजा आम का मौसम अब समाप्त होने को है. अक्षय तृतीय से आम खाने का सिलसिला शुरू होता है, वह वर्षाकाल के शुरू होने के कुछ दिनों बाद समाप्त हो जाता है. तरबूज तो गर्मी के मौसम में खाया जाने वाला फल है. केले को छोड़कर अन्य फलों का अपना-अपना सीजन है. इसलिए हर सीजन में आने वाले फल का विशेष महत्व होता है और जैसे ही वह फल बाजार में आता है. खरीदने वाले उसे खरीदना शुरू कर देते हैं. मानसून के सीजन में जामुन की मांग सबसे ज्यादा रहती है. मानसून के दिनों में जामुन की मांग उसी तरह बढ़ जाती है, जैसे ठंड के मौसम में चाय या गरमागरम भोजन की चाहत रहती है.

पाचक होता है फल
जामुन का फल बहुत पाचक होता है. इसलिए मानसून के मौसम में भोजन के बाद अगर जामुन खाया जाए तो हाजमा ठीक हो जाता है. जामुन डायबिटीज के रोगियों के लिए रामबाण दवा है. जामुन बहुत महंगा नहीं होता, इसलिए इसे सामान्य लोग भी खरीद सकते हैं. जिस तरह से दही-चावल खाने से हर सीजन में पेट संबंधी समस्याओं का समाधान होता है, उसी तरह मानसून काल में पेट की बीमारियों स बचने के लिए जामुन का नित्य सेवन बहुत अच्छा होता है. जिस तरह भोजन के बाद अगर अमरुद का सेवन किया जाए तो अपचन, अजीर्ण, गैस, एसिडीटी जैसी परेशानियों से मुक्ति मिलती है, उसी तरह मानसून काल में जामुन का सेवन करने का सीधा अर्थ यही है पेट की बीमारियों से मुक्ति पा लेना. 

बिक्री पर पड़ा प्रतिकुल असर
कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष तरबूज, आम, अंगूर जैसे फलों की बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ा है. क्या जामुन की बिक्री पर भी उसी तरह का असर पड़ेगा, ऐसा सवाल पूछने पर एक दूकानदार ने बताया कि साहब अभी तो मानसून शुरू हुआ ही है, लोग अभी-भी आम खरीदने के प्रति ज्यादा उत्साही हैं, जामुन से बाजार जरूर भर गए हैं, लेकिन अभी उतने ग्राहक नहीं आए हैं, जितने अपेक्षित थे. दूकानदारों को भरोसा है कि आने वाले दिनों में ग्राहकी बढ़ेगी, लेकिन कोरोना के कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष खरीदारों की संख्या कम होगी.

कोरोना के कारण आम सीजन में आम की आवक पर असर जरूर दिखा था, लेकिन जामुन के बारे में ऐसी बात नहीं है. जामुन की आवक बाजार में अच्छी खासी है, लेकिन ग्राहक नहीं आ रहे.