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भारत की स्वर कोकिला के रूप में पहचाने वाली गायिका लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) आज अपना 91 वां जन्मदिन मना रही हैं।

मुंबई. भारत की स्वर कोकिला के रूप में पहचाने वाली गायिका लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) आज अपना  91 वां जन्मदिन मना रही हैं। लता मंगेशकर (lata Mangeshkar)ने अपनी सुरीली आवाज़ से करोड़ो लोगों का दिल जीता हैं। छह दशकों से भी ज़्यादा संगीत की दुनिया अपने आवाज़ से लोगों को दीवाना बनाने वाली लता मंगेशकर (lata Mangeshkar)के ज़िंदगी में भी कई उतार चढाव आए थे। लेकिन, उन्होंने मुश्किलों का डटकर सामना करते हुए अपनी मंज़िल हासिल कर ली।

लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) का जन्म 28 सितंबर, 1929 को एक मध्यम वर्गीय मराठा परिवार में हुआ था। लता का पहला नाम ‘हेमा’ था। लेकिन, 5 साल बाद माता-पिता ने इनका नाम ‘लता’ रख दिया था। लता (lata Mangeshkar) ने 5 साल की उम्र में संगीत सिखाना शुरू किया था। उन्होंने अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से संगीत सीखा था ।वह अपनी बहनें आशा, ऊषा और मीना के साथ संगीत सीखा करतीं थीं।  

लता (lata Mangeshkar) जब 13 साल की थी, तब साल 1942 उनके पिता का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) पर घर की सारी जिम्मेदारियां आ गई।  सबकी ज़िम्मेदारी खुद पर देख उन्होंने शादी न करने का फैसला लिया। लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने महज 5 साल की उम्र में पहली बार नाटक में अभिनय किया। इसके बाद 14 साल की उम्र में लता फिल्मों में हीरो या हीरोइन की बहन के किरदार में नज़र आने लगी। लेकिन, मंगेशकर की संगीत में रूचि थी। इसलिये उन्होंने संगीत सीखना जारी रखा।

लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) केवल एक दिन स्कूल गई थी। दरअसल, लता पहली बार अपनी छोटी बहन आशा भोंसले के साथ स्कूल गईं। दोनों को देख टिचर   ने आशा भोसले को स्कूल से निकाल दिया। टिचर ने कहा की दोनों को अलग अलग फ़ीस भरनी होगी । पैसों की कमी होने के वजह से लता ने स्कूल जाना छोड़ दिया।  

लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने पहली बार जब मंच पर गाना गया था तब उन्हें 25 रुपये मिले थे। इसे वह अपनी पहली कमाई मानती हैं। लता मंगेशकर ने पहली बार साल 1942 में मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए गाना गाया। लता मंगेशकर के बाद उनके भाई, बहनों ने भी संगीत को ही अपना करियर चुना।लता मंगेशकर गाने गाने की रिकॉर्डिंग के लिये जाने से पहले अपनी चप्पलें कमरे के बाहर निकाल कर रखती हैं। उन्होंने आज तक अपना यह नियम नहीं तोडा।

खास बात यह है कि एक दिन स्कूल गई लता (lata Mangeshkar) को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित 6  विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया। लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया।

साल 1974 में लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) को दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का रिकॉर्ड बनाया था। इसे ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में भी दर्ज किया गया है। बता दें कि लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने 20 भाषाओं में 30,000 गीत  गाये हैं। लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने सबसे ज़्यादा गाने मोहम्मद रफी के साथ गाए थे। लेकिन,कुछ सालों बाद लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) ने रफ़ी से बातचीत करना बंद कर दिया था। 

बहुत काम लोगों पता होगा कि लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) को जहर दिया। जी हाँ, जब लता मंगेशकर (lata Mangeshkar) 33  साल की थी तब उन्हें स्लो प्वॉइजन यानी ज़हर दिया गया था। लेखिका पद्मा सचदेव ने अपनी किताब ‘ऐसा कहां से लाऊं’ में इस बात को विस्तार से लिखती हैं। पद्मा सचदेव ने अपनी किताब में लिखा कि ‘यह साल 1962 की बात है। तब लता मंगेशकर  (lata Mangeshkar) 33 साल की थीं तो उन्होंने मुझे ये बात बताई थी। एक दिन सुबह उनके पेट में तेज दर्द होने लगा। थोड़ी देर में उन्हें दो-तीन बार उल्टियां हुईं। जिसमें हरे रंग की कोई चीज थी।’

उन्होंने बताया कि ‘वो बिल्कुल चलने की हालत में नहीं हैं। उनके पूरे शरीर में तेज दर्ज होने लगा। इस स्लो प्वॉइजन की वजह से लता मंगेशकर बेहद कमजोर हो गई थीं। उन्होंने 3 महीने तक बेड रेस्ट किया और कोई गाना नहीं गा पाईं।’ हालाँकि अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया कि आखिर किसने लता मंगेशकर को मारने की कोशिश की थी। कहा जाता है कि जिस इस बात का पता चला, उस दिन उनका कुक नौकरी छोड़ गया।