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चंद्रपुर/राजुरा/दुर्गापुर. 11 राष्ट्रीय कामगार संगठनों एवं फेडरेशन एवं राज्य एवं केन्द्र स्तर के कर्मचारी संगठन द्वारा गुरुवार को हड़ताल की घोषणा की गई थी. इसे जिले में अच्छा प्रतिसाद मिला. वेकोलि बल्लारपुर क्षेत्र में 8 कोयला खदानों में हड़ताल का असर दिखाई दिया. आंशिक रूप से उत्खनन हो पाया. बैंक एवं पोस्ट विभाग भी बंद रहे. इस क्षेत्र में शतप्रतिशत प्रतिसाद मिला. वहीं वेकोलि प्रशासन ने हड़ताल का असर नहीं होने की बात कही है. सभी खदानों में उत्पादन शुरू होने का दावा वेकोलि प्रशासन ने किया.

कामगार विरोधी नीतियों का निषेध

वेकोलि के आयटक, इंटक, एचएमएस एवं सीटू कामगार संगठनों ने कामगार विरोधी नीतियों के विरोध में बंद की घोषणा की थी. भारतीय मजदूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं हुआ. बल्लारपुर क्षेत्र में सास्ती, गोवरी, पोवनी, बल्लारपुर, गोवरी डीप ओपनकास्ट कोयला खदान और बल्लारपुर 3-4 पिट एवं सास्ती भूमिगत कोयला खदान है. बल्लारपुर एवं पवनी खदानों को छोड़कर अन्य खदानों में हड़ताल सफल रही. दोनों खदानों में कुछ कामगार काम पर जाने से कुछ प्रमाण में उत्पादन हुआ.

वेकोलि खदान में कार्यरत निजी मिट्टी उत्खनन कार्य आज पूर्ण रूप से बंद था. आंदोलन का नेतृत्व नंदकिशोर म्हस्के, मधुकर ठाकरे, आर. शंकरदास, अशोक चिवंडे, दिलीप कनकुलवार, रायलिंगू झुपाका, गणपत कुड़े, ईश्वर गिरी, रवि डाहुले, विजय कनकाटे, दिनेश जावरे, रंगराव कुलसंगे, गणेश नाथे आदि ने किया.

हड़ताल का असर नहीं होने का दावा

इस बीच, वेकोलि प्रशासन ने कहा कि हड़ताल का कोई असर नहीं देखा गया. दुर्गापुर ओपनकास्ट खदान एवं भटाली खदान में 80 फीसदी वेकोलि काम पर आए, जबकि 20 फीसदी वेकोलि कर्मी हड़ताल में शामिल हुए. पदमापुर खदान तो पहले ही भूस्खलन के कारण बंद है. फिर भी कोयला कर्मी यहां पहुंचे थे. पदमापुर खदान में कार्यरत 80 फीसदी कर्मियों ने अपनी उपस्थिति दर्शायी. 20 फीसदी कर्मियों की अनुपस्थिति रही. कुल मिलाकर भटाली, पदमापुर, दुर्गापुर में भी 80 फीसदी कामगार स्वेच्छा से ड्यूटी पर आए.

आयटक का कलेक्ट्रेट पर धरना

जिलाधिकारी कार्यालय पर आयटक के नेतृत्व में धरना आंदोलन कर केन्द्र सरकार की नीतियों का तीव्र निषेध किया गया. जिलाधिकारी के माध्यम से विभिन्न मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को भेजा गया. धरना आंदोलन का नेतृत्व आयटक के राज्य सचिव विनोद झोड़गे, भाकपा के जिला सचिव प्रा. नामदेव कनाके, संतोष दास, एम.एस.ई.बी. वर्कर्स फेडरेशन के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रकाश वानखेड़े, संजय नागपुरे, संयुक्त खदान मजदुर संघ के प्रदीप चीता डे, जेकेब, आशा वर्कर व गट प्रवर्तक संगठन के राजू गयनेवार, सविता गठलेवार, स्कूली पोषण आहार संगठन की वनिता कुंनटावार, कुंदा कोहपरे ने किया. 40 मांगों का ज्ञापन सौंपा गया.