घरों में ही अदा होगी ईद उल अजहा की नमाज

  • कोरोना के चलते मस्जिदों, ईदगाह पर पाबंदी

चंद्रपुर. मुस्लिमों के प्रमुख त्यौंहारों में एक ईद उल अजहा अर्थात बकरीद का पर्व आज शनिवार को पूरे अकीदत से मनाया जाएगा. इस पर्व पर इस्लाम को माननेवाले सभी अनुयायी इस्लाम के धर्मगुरू हजरत ईस्माईल अलैह सल्लाम एवं उनके बेटे हजरत ईस्माईल अलैह सलाम के महान कुर्बानी के जज्बे को याद करते हुए प्रतिवर्ष मनाते आ रहे है. इस दिन मस्जिदों और ईदगाहों में ईद की नमाज सामूहिक रूप से अदा की जाती है और जिन्हें ईश्वर ने साधन संपन्न मनाया है वें घर आकर बकरे की कुर्बानी देकर उसका गोश्त अपने रिश्तेदारों और गरीबों में तकसीम करते है. चूंकि इस वर्ष पूरी दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप छाया हुआ है जिसके चलते सामूहिक रूप से एकत्रित होने के कारण कोरोना के संक्रमण का खतरा है इसके देखते हुए सरकार ने सभी धार्मिक अनुष्ठानों जिसमें लोगों के एकत्रित होने की संभावना है उस पर रोक लगाकर व्यक्तिगत रूप से घरों में ही सभी सण त्यौंहार मनाने की सख्त हिदायत दी है. इस वजह से ईद उल अजहा की नमाज भी ईद उल फितर की नमाज की तरह घरों में ही अदा होगी.

आज फजर की नमाज के 20 मिनट के बाद से लेकर सुबह 10 बजे तक मुस्लिम भाई अपनी अपनी सुविधा के अनुसार घरों में ही ईद की नमाज अर्थात चाश्त की नमाज अदा करेंगे.

यह त्यौंहार कुर्बानी के जज्बे की याद को ताजा करने के लिए मनाया जाता है. ईश्वर ने धर्मगुरू हजरत ईब्राहिम अलैह सलाम से अपना सबसे प्रिय ईश्वर की राह में कुर्बान करने को कहा था. उनकी नजर में बेटे बढकर कोई प्रिय नहीं था इसलिए वें अपने बेटे हजरत ईस्माईल अलैह सलाम को ईश्वर के लिए कुर्बान करने जा रहे थे उसी समय ईश्वर ने बेटे के स्थान पर मेंढे को तब्दील कर दिया. इसलिए हिन्दुस्थान के इस्लाम के अनुयायी आज के दिन प्रतिकात्मक रूप से बकरे की कुर्बानी देते है. बकरे का गोश्त तीन हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा परिवार, एक हिस्सा रिश्तेदारों और एक हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है. इसमें यह भी भावना निहित है कि कम से कम वर्ष में एक बार किसी गरीब को अच्छे से अच्छा व्यंजन खाना नसीब हो और वह अपने परिवार के साथ लजीज व्यंजन का मजा ले सके.