तेल छोड़ने से इरई नदी प्रदूषित, पानी के सतह पर तेल की लेयर

चंद्रपुर. चंद्रपुर शहर की जीवनदायिनी इरई नदी में तेल छोड़ने से नदी के सतह पर तेल फैला हुआ नजर आ रहा है. पानी प्रदूषित होने से जलचरों पर खतरा निर्माण हो गया है साथ ही पेयजल भी प्रभावित हो रहा है जिला प्रशासन समय पर दखल लेते हुए उपाययोजना करें ऐसी मांग की जा रही है.

साल भर भरी रहती है यह नदी

चंद्रपुर शहर में एकमात्र इरई नदी  पूरे साल भर भरी रहती है. इसके पानी से चंद्रपुर वासियों की प्यास बूझ रहीह है. आधे चंद्रपुर शहर का गंदा पानी रामाला तालाब एवं इरई नदी में बहर आने से पहले से ही पानी दूषित होने से इसका परिणाम पानी पर हो रहा है. इन कारणों से नदी के अस्तित्व पर खतरा निर्माण हो गया है. दो दिन पूर्व नदी के सतह पर तेल फैला हुआ नजर आया. यह तेल कहा से आया और किसने छोड़ा यह पता नहीं चल पाया है.

दो वर्ष से कम हुआ था जलप्रदूषण

नदी के आसपास उद्योग है कुछ उद्योगों का रसायन नदी में छोडने से इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी है. इस बार भी इस तरह की संभावना जतायी जा रही है. वर्ष 2008  से 2014 के दौरान चंद्रपुर जिले में परिसर की वर्धा, वैनगंगा और प्राणहिता नदियों को अत्यंत जोखिम एवं मध्यम प्रमाण के प्रदूषण के श्रेणी में रखा गया था परंतु पिछले दो वर्षों में चंद्रपुर में जलप्रदूषण कम होने से समाधानकारक चित्र नजर आ रहा था. नदी में जलप्रदूषण कम करने के लिए तत्काल कदम उठायने की आवश्यकता है जबकि यहां पानी में रसायन और तेल छोडने का काम अब भी बदस्तूर जारही है.

प्रदूषण नियंत्रण मंडल ध्यान दें – प्रा. सुरेश चोपणे

पर्यावरणविदय एवं ग्रीन प्लेनेट सोसायटी के अध्यक्ष प्रा.सुरेश चोपणे का कहना है कि चंद्रपुर वासियों की प्यास बूझानेवाली इरई नदी के सतह पर तेल छोड़ने से पानी पर यह तैरता हुआ नजर आ रहा है नदी पहले से प्रदूषित है, प्रदूषण को कम करने की मांग उठ रही है. नदी का अस्तित्व टिकाय रखने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा समय पर कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है.