इस महिला हेड कांस्टेबल पर आपको होगा गर्व, बचाई है कई मासूमों की जान

दिल्ली: दिल्ली पुलिस में कार्यरत महिला हेड कांस्टेबल (Female Head Constable) सीमा ढाका (Seema Dhaka) ने लगभग तीन महीने तक एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली, क्योंकि उन्होंने 76 लापता बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने की कसम खाई थी। वह ज्यादातर दिनों में दो-तीन घंटे के लिए घर जाती थीं और यदि उन्हें आधी रात में एक बच्चे के बारे में कोई सुराग मिला, तो उसको फॉलो करने में एक क्षण नहीं लगाती थीं।

दरअसल, दिल्ली पुलिस में तैनात महिला हेड कांस्टेबल सीमा ढाका ने अपने कर्तव्यनिष्ठा और साहस के चलते 3 महीने के दौरान 76 बच्चों को तलाश में कामयाबी हासिल की है। जिसके कारण, उनको सम्मानित करने के लिए उन्हें ‘आउट ऑफ टर्न प्रमोशन’ दे, सहायक उप-निरीक्षक पद पर प्रमोट कर दिया गया है। इसी के साथ सीमा ‘आउट ऑफ टर्न प्रमोशन’ प्राप्त करने वाली दिल्ली पुलिस की पहली कर्मचारी बन गई हैं।

सीमा ने कहा, “ये दो बच्चे थे जिन्हें मैंने ट्रेस किया। पश्चिम बंगाल में मैं उन्हें उनके घर छोड़ने जा रही थी जिस दौरान, ट्रेन यात्रा में उनका मेरे साथ एक विशेष लगाव हो गया। जब मुझे वहां से निकलना था तब रो रहे थे।”

मूलरूप से बड़ौत की रहने वाली हैं सीमा 

सीमा ढाका मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बड़ौत की रहने वाली हैं। सीमा के पति का नाम अनिक ढाका है, जो खुद पुलिस वाले हैं। सीमा के पिता पेशे से किसान हैं और भाई निजी क्षेत्र में जॉब करता है। सीमा का कहना है कि पढ़ाई के प्रति लगाव और जुनून ही था कि गांव से कॉलेज की दूरी करीब 6 किलोमीटर थी, लेकिन साइकिल से रोजाना आती-जाती थी। फिर भी थकान का कभी अहसास तक नहीं हुआ। आउट और टर्न प्रमोशन पानी वालीं सीमा ढाका की इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के 2-2 जिलों में जश्न का माहौल है। सीमा की ससुराल शामली में खुशी है तो मायके बड़ौत के लोग भी फोन पर उन्हें इसके लिए बधाइयां दे रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 7 अगस्त के बाद से लापता 1,440 बच्चों का पता लगाया है, जबकि इस दौरान 1,222 के लापता होने की सूचना मिली थी। घोषित प्रोत्साहनों के अनुसार, 12 महीने में 50 या अधिक लापता बच्चों का पता लगाने वाले कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल आउट-ऑफ-टर्न प्रचार के लिए पात्र हैं।

2019 में, 5,412 बच्चों के लापता होने की सूचना मिली, जिनमें से 61.64% का पता लगाया गया। इस साल, अब तक लापता बच्चों की संख्या 3,507 है जबकि रिकवरी दर 74.96% है।