Distribution of about five lakh forest rights papers in Chhattisgarh
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    गड़चिरोली. पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को संपूर्ण अधिकार दिया गया है. प्राप्त अधिकार नुसार ग्रामसभाएं तेंदूपत्ता संकलन कर सिधे कंपनी को तेंदूपत्ता बेच रहे है. इस वर्ष भी ग्रामसभाओं द्वारा तेंदूपत्ता संकलन की प्रक्रिया पूर्ण कर तथा पेसा कानून के तहत प्राप्त अधिकार नुसार टीपी तैयार कर सिधे कंपनी तक तेंदूपत्ता पहंचाया जा रहा है. लेकिन 5 जून को चामोर्शी तहसील के आष्टी जांच नाके पर वनविभाग के अधिकारी ने तेंदूपत्ता के बोरों से भरे 4 ट्रकों को रोका है.

    वहीं पिछले 5 दिनों से तेंदूपत्ता से भरे ट्रक एक जगह पर खड़े है. ऐसे में तेंदूपत्ता खराब होने की गंभीर संभावना है. यदि तेंदूपत्ता खराब हुआ तो करीब 73 लाख रूपयों का नुकसान होगा. पेसा कानून के तहत प्राप्त अधिकार नुसार कार्य करने के बावजूद भी वनविभाग और प्रशासन कार्य नहीं करने देने से संबंधितों द्वारा पेसा कानून का हनन किया जा रहा है. ऐसा आरोप गुरूवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में 40 ग्रामसभाओं के प्रतिनिधियों ने लगाया है. 

    वनविभाग को अवगत कर शुरू है प्रक्रिया 

    ग्रामसभा के पदाधिकारियों ने बताया कि, पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को तेदूपत्ता संकलन और बिक्री करने का अधिकार मिला है. जिसके तहत पिछले 5-6 वर्षो से प्रति वर्ष तेंदूपत्ता सीजन के पहले वनविभाग को पत्रव्यवहार कर तेंदूपत्ता संकलन करने संदर्भ में जानकारी दी जा रही है. इसके अलावा जिलाधिश कार्यालय व जिला परिषद को भी निवेदन जरिये जानकारी दी जाती है.

    पिछले 5 वर्षो से ग्रामसभाएं तेंदूपत्ता संकलन व बिक्री का कार्य करती आ रही है. लेकिन इस वनविभाग वनविभाग ने तेंदूपत्ता की ढूलाई करनेवाले 4 ट्रकों को रोककर ग्रामसभा के कार्य में बाधा पहुंचाया है. यदि तेंदूपत्ता खराब होगा तो, इसे जिम्मेदार वनविभाग और जिला प्रशासन होगा. ऐसी बात पदाधिकारियों ने कही. 

    न्यायालय में जाएंगे

    पेसा कानून के तहत सभी तरह का अधिकार ग्रामसभाओं को प्राप्त हुआ है. जिससे तेंदूपत्ता संकलन के माध्यम से मिलनेवाली आय से नियमित रूप से जीएसटी के रूप में राशि जमा भी की जा रही है. वहीं मजदूर व तेंदूपत्ता संकलन प्रक्रिया में समावेश सभी लोगों को उनके मेहनत की मजदूरी भी दी जा रही है. ग्रामसभा को सर्वाधिक अधिकार होने के बावजूद भी वनविभाग ग्रामसभाओं के कार्य में बाधा पहुंचा रहा है.

    इस मामले में ग्रामसभाएं न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिये तैयार है. ट्रक रोकने मामले में जिलाधिश और मुख्य वनसंरक्षक से भी चर्चा की गई है. ऐसी जानकारी पदाधिकारियों ने दी. संवाददाता सम्मेलन में धिवाजी नरोटे, बावसू पावे, नितिन पदा, काशिनाथ आतला, देवसाय आतला, दिनेश टेकाम समेत 40 ग्रामसभाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे.