जिले में भारत बंद को व्यापक प्रतिसाद

  • जिला मुख्यालय के साथ अनेक शहरों की बाजारपेठ शतप्रतिशत बंद
  • आंदोलन में विभीन्न दलों का सहभाग

गडचिरोली. केंद्र सरकार ने बहुमत के जोर पर पारित किए गए किसान विरोधी तिनों काले कानुन रद्द करे, इस मांग के साथ दिल्ली के किसानों के आंदोलन को समर्थन देते हुए मंगलवार 8 दिसंबर को जिले में जगह जगह बंद रखा गया. भारत बंद के दौरान जिला मुख्यालय समेत सभी तहसील के महत्वपूर्ण शहर व गांवों की बाजारपेठ शतप्रतिशत बंद रखी गई थी.

देशभर में शुरू होनेवाले भारतबंद को समर्थन देते हुए सर्वदलीय नेताओं ने सुबह से ही आंदोलन की रूपरेषा तैयार की थी. गडचिरेाली जिला मुख्यलाय पर कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना, भारतीय रिपब्लिकन पक्ष, शेकाप, भाकपा, माकपा, आप, वंचित बहूजन आघाडी आदि समेत अन्य दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ते सुबह से ही सडक पर उतरे थे. सुबह 9 बजे के दौरान कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस व शेकाप की ओर से शहर से रैली निकालकर नागरिकों को बंद में सहभाग लेने का आह्वान किया गया. वहीं शिवसेना उपजिल्हा प्रमुख अरविंद कात्रटवार के नेतृत्व में मोर्चा निकाला गया. शहर के नागरिकों ने तथा व्यापारियों ने बंद को प्रतिसाद देते हुए अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे थे. 

गडचिरोली जिला मुख्यालय पर कांग्रेस कमिटी के जिलाध्यक्ष तथा पूर्व विधायक डा. नामदेव उसेंडी, युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष महेंद्र ब्राम्हणवाडे, राकां जिलाध्यक्ष रविंद्र वासेकर, शेकाप के जिला चिटणीस रामदास जराते, शेकाप की महिला नेते जयश्री वेलदा, रिपब्लिकन पार्टी के रोहिदास राऊत ऐसे महाविकास आघाडी के घटक दलों के पदाधिकारियों के साथ अन्य दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने बंद मं सहभाग लिया था. बंद के पूर्व सुबह के दौरान स्थानीय इंदिरा गांधी चौक में किसान सभा का आयोजन किया गया था. इस समय सर्वदलीय नेताओं ने केंद्र सरकार के किसान विरोधी नितियों पर जोरदार नारेबाजी की.

इसके पश्चात किसान विरोधी तिनों काले कानुन रद्द करे, इस मांग का ज्ञापन जिलाधिकारी के मार्फत राष्ट्रपति को भेजा गया है. इस समय राकां के कार्याध्यक्ष प्रकाश ताकसांडे, रिपब्लीकन पार्टी के रोहिदास राऊत, शिवसेना जिल्हा संपर्क प्रमुख किशोर पोतदार, शिवसेना उपजिला प्रमुख अरविंद कात्रटवार, सतीश विधाते, वामनराव सावसाकडे, प्रभाकर वासेकर, देवराव चवले, नंदू वाईलकर, शेकाप के रामदास जराते, शेकाप के शामसुंदर उराडे, आप के बालकृष्ण सावसाकडे आदि समेत विभीन्न दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ते उपस्थित थे. आंदेालन के दौरान कोई अनुचित घटना न हो इस दृष्टि से पुलिस का तगडा बंदोबस्त रखा गया था. 

आवश्यक सेवा छोड सभी प्रतिष्ठाने बंद 

आज भारत बंद के दौरान जिलामुख्यालय होनेवाले गडचिरोली जिले के अनेक तहसील मुख्यालय तथा शहरों में बंद रखा गया. इस समय आवश्यक सेवा छोड सभी प्रतिष्ठाने बंद रखते हएु व्यावसाईयों ने बंद को समर्थन दिया. 

यहां भारत बंद को मिला समर्थन

भारत बंदला जिले में विभीन्न जगह व्यापक प्रतिसाद देते हुए बंद रखा गया. इस दौरान जिला मुख्यालय के साथ तहसील मुख्यालय तथा अनेक बडे शहरों में व्यापारियों ने प्रतिष्ठाने बंद रखते हुए समर्थ्ज्ञन दिया. अहेरी में विधायक तथा राकां नेते धर्मरावबाबा आत्राम, आविस नेते तथा पूर्व विधायक दिपक आत्राम, जिप अध्यक्ष इनके नेतृत्व में बंद रखा गया. वहीं धानोरा शहर में भी बंद को व्यापक प्रतिसाद मिला. यहां जिप उपाध्यक्ष तथा कांग्रेस के तहसील अध्यक्ष मनोहर पाटील पोरेटी, राकां के तहसील अध्यक्ष सोपानदेव मशाखेत्री, शिवसेना तहसील अध्यक्ष शेखर उईके आदि के नेतृत्व में बंद को सफल बनाया गया. कोरची तहसील में कांग्रेस के तहसील अध्यक्ष शामलाल मडावी, राकां के तहसील कार्याध्यक्ष भजन मोहुर्ले, शिवसेना के तहसील अध्यक्ष रमेश मानकर, कांग्रेस के जिला महासचिव तथा पार्षद मनोज अग्रवाल, रायुका के चेतन कराडे, नरेश देशमुख आदि के नेतृत्व में बंद को सफल बनाया गया. इस दौरान मांगों का ज्ञापन तहसीलदार के मार्फत राष्ट्रपति को भेजा गया. आरमोरी, चामोर्शी, कुरखेडा में भी बंद को व्यापक प्रतिसाद मिला. 

एटापल्लीत में कोई प्रतिसाद नहीं

किसानों के आंदोलन को समर्थन देते हुए जिलेभर में बंद रखा गया. मात्र जिले के अहेरी उपविभाग के एटापल्ली शहर समेत हसील में भारत बंद को कोई प्रतिसाद नहीं मिला. जिलेभर में महाविकास आघाडी ने आंदोलन का नेतृत्व किया. इसमें सर्वदलीय पदाधिकारी सहभागी हुए थे. मात्र एटापल्ली शहर में महाविकास आघाडी के एक भी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं में नियोजन का अभाव दिखाई दिया. एटापल्ली तहसील मुख्यालय समेत तहसील के बडे गांवों में बाजारपेठ सुचारू रूप से शुरू दिखाई दी. वहीं सिरोंचा में मिलाजुला असर दिखाई दिया. देसाईगंज तहसील में सुबह से दोपहर 12 बजे तक बंद को प्रतिसाद मिलता नजर आ रहा था. मात्र दोपहर 12 बजे के बाद सभी प्रतिष्ठाण शुरू हुए. जिससे यहां बंद को मिलाजुला प्रतिसाद देखने को मिला.