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    गोंदिया. शाला का पहला दिन विद्यार्थियों के लिए आनंद का पर्व होता है. नया गणवेश, नई किताबें, नए कक्षा मित्र इन सभी का उत्साह उनमें होता है. वहीं छोटे बालकों को शाला में जाने से भय लगता है. ऐसे में वे माता-पिता की उंगली नही छोड़ते हैं. इसी तरह विद्यार्थियों के स्वागत के लिए शाला के प्रवेश द्वार की आकर्षक सजावट की जाती है.

    हर वर्ष यह चित्र शाला के पहले दिन ही दिखाई देता है. लेकिन इस बार नए शैक्षणिक सत्र की गत 28 जून से शुरुआत हो गई, वह भी बिना विद्यार्थियों के ही. जिससे शाला का पहला दिन विद्यार्थियों की बिना शोरगुल के पहली बार दिखाई दिया है. कोरोना संकट से पिछले डेढ़ वर्ष से शालाएं बंद हैं. कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है. इसके बाद भी खतरा टला नहीं है. विद्यार्थियों की सुरक्षा की दृष्टि से शासन ने नए शैक्षणिक सत्र की 28 जून से शुरुआत की है. जबकि प्रत्यक्ष में विद्यार्थियों को शाला में न बुलाकर ऑनलाइन पाठ‍्यक्रम लेने की सूचना शिक्षा विभाग ने दी है. जिससे सोमवार से शाला की पहली घंटी बजी.

    शिक्षक भी शाला में पहुंचे लेकिन उन्हों बिना विद्यार्थियों के शाला का पहला दिन मनाना पड़ा है. कोरोना ने अनेक बातों को बदल दिया है. इसमें नई-नई चीजें पहली बार हो रही हैं. शाला का पहला दिन यह बिना विद्यार्थियों के मनाने की घटना पहली बार घटी है. डेढ़ वर्ष बाद शाला शुरू होगी, हम भी शाला में जाएंगे, हमारे पुराने मित्र मिलेंगे, नए शिक्षक, नई कक्षा इन सभी बातों की कल्पना विद्यार्थियों ने की थी. लेकिन कोरोना ने उनके उत्साह व आनंद को ठंडा कर दिया.

    जिले में जिला परिषद की 1039, बिना अनुदानित 345 व अनुदानित 245 इस तरह कुल 1663 शाला सोमवार से शुरू हुई. जिप की तिरोडा तहसील अंतर्गत कोडेलोहारा शाला सहित कुछ शालाओं में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम मनाया गया. इसे विद्यार्थियों का भी ऑनलाइन अच्छा प्रतिसाद मिला. शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाने का प्रयास किया. 

    शालेय व्यवस्थापन समितियों की सभा

    शाला ऑनलाइन होने से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों का नुकसान न हो इसके लिए चलो करें अभ्यास, यह उपक्रम शुरू किया गया है. इस उपक्रम के अंतर्गत शिक्षक घर-घर जाकर विद्यार्थियों क अध्ययन कराएंगे. इस उपक्रम को पालकों ने सहयोग किया. इसके लिए शालेय व्यवस्थापन समितियों की हर एक गांव में सोमवार को बैठक ली गई. 

    घर पहुंच मिलेंगी पाठ‍्यपुस्तकें

    कोरोना संक्रमण से विद्यार्थी प्रत्यक्ष शाला में कब आएंगे यह बताया नहीं जा सकता. जबकि विद्यार्थियों को गणवेश व पाठ‍्यपुस्तकों का वितरण घर पहुंच किया जाएगा. 

     

    विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं

    कोरोना से विद्यार्थी शाला में प्रत्यक्ष आएंगे, इसकी कोई गारंटी नही है. शाला का पहला दिन विद्यार्थियों के बिना होगा. जिप शिक्षा विभाग ने सभी शालाओं को चकाचक कर रखा था. शाला को रंगरोगन, विद्यार्थियों के स्वागत, नक्कासीदार काम, कक्षा रुम तथा डेस्क बैंच भी स्वच्छ कर रखे थे. 

    गृहभेंट से पहले दिन शुरुआत

    जिप शिक्षा विभाग ने शाला बंद होने से विद्यार्थियों के शैक्षणिक नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन का असर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों पर न पड़े. जिससे चलो करें अभ्यास, यह उपक्रम शुरू किया है. इसी उपक्रम की शुरुआत शाला के प्रथम दिन हुई. शिक्षकों ने विद्यार्थियों के घर जाकर व गांव की चौपाल पर एकत्र होकर नए शैक्षणिक सत्र के पाठ‍्यक्रम की शुरुआत की. जिससे विद्यार्थियों में उत्साह निर्मित हो गया है.