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नयी दिल्ली. मोदी सरकार (Narendra Modi))  द्वारा लाये गए विवादस्पद ‘कृषि कानूनों’ (Farm Laws) के खिलाफ किसानों के आंदोलन (Farmers Agitation) का आज सत्रहवा दिन (17th Day) है। अब किसान संगठनों ने अपने तेवर कड़े करते हुए दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (Delhi-Jaipur Highway) पर ट्रैफिक ठप करनी की चेतावनी दी है। उधर दूसरी तरफ हरियाणा में किसानों ने टोल प्लाजा को घेरने का भी आह्वान किया है। इसके चलते गुरुग्राम और फरीदाबाद की पुलिस हाई अलर्ट है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले ही कर लिए गए हैं।

क्या का किसानों का मंतव्य:

जहाँ एक तरफ एक तरफ किसानों की अपनी जिद है वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार द्वारा ‘कानून’ वापस ना लेने की धमक। इसके साथ ही किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि आगामी 12 दिसंबर को किसान दिल्ली-जयपुर हाइवे का घेराव कर उसे ब्लॉक करेंगे। इस दौरान किसान जिला कलेक्टर, बीजेपी नेताओं के घरों के सामने भी अपना प्रदर्शन करेंगे तो टोल प्लाज भी वे जाम करेंगे। 

क्या कहती है BKU:

गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने बीते शुक्रवार को कहा था कि यदि सरकार किसान नेताओं से बातचीत करना चाहती है, तो उसे पिछली बार की तरह औपचारिक रूप से संदेश देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि नये कृषि कानूनों को खत्म किए जाने से कम, कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। बता दें कि सरकार ने बीते बृहस्पतिवार को किसान संगठनों से, उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए अधिनियम में संशोधन करने के उसके प्रस्तावों पर गौर करने का आह्वान किया था और कहा था कि जब भी किसान संगठन चाहें, वह उनके साथ इसपर चर्चा के लिए तैयार है। BKU के नेता राकेश टिकैत ने साफ़ कहा कि, ‘‘ एक बात बहुत स्पष्ट है कि किसान नये कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने से कुछ भी कम स्वीकार नहीं करेंगे।” उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में गाजीपुर-दिल्ली बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि शनिवार यानि आज सुबह विरोध मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘BKU के कार्यकर्ताओं द्वारा सभी राजमार्गों को टोल मुक्त कर दिया जाएगा।”

नरेंद्र तोमर: आशा है कि शीघ्र ही निकलेगा हल:

इधर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर (Narendra Singh Tomar) ने आशा जतायी कि शीघ्र ही हल निकल आएगा। उन्होंने केंद्रीय खाद्य एवं रेल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बीते शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा था कि, ‘‘सरकार प्रदर्शनकारी किसानों के साथ और चर्चा करने के लिए तैयार है, हमने किसान संगठनों को अपने प्रस्ताव भेजा हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे यथासंभव चर्चा के लिए तारीख तय करने की अपील करना चाहता हूं। यदि उनका कोई मुद्दा है तो सरकार चर्चा के लिए तैयार है।” कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि जब वार्ता जारी है तब किसान संगठनों के लिए आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करना उचित नहीं है, उनकी उनसे वार्ता की मेज पर लौट आने की अपील है। वहीं ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति ने तोमर की उनके बयान को लेकर कड़ी आलोचना की और दावा किया कि सरकार ही है, जो कानूनों को वापस नहीं लेने पर अड़ी हुई है।

क्या हुआ अब तक:

गौरतलब है कि मोदी सरकार और किसान नेताओं, के बीच अब तक कम से कम पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन गतिरोध अभी भी जारी है। राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर दो सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे किसान, मोदी सरकार के नये विवादस्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की प्रणाली बरकरार रखने की मांग कर रहे हैं। सरकार और किसान नेताओं के बीच छठे दौर की वार्ता जो बीते बुधवार को होनी थी, वह भी रद्द हो गई थी।