कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का पुत्र मोह बना टूट का कारण?

भोपाल. मध्य प्रदेश का सियासत संकट और गहराता जा रहा है। वहीं इस पर कई सवाल भी खड़े हो रहे है। सवाल यह है कि इसके लिए क्या भाजपा जिम्मेदार है? या फिर कांग्रेस के अंदर केही नेता इसके लिए जिम्मेदार है?

भोपाल. मध्य प्रदेश का सियासत संकट और गहराता जा रहा है। वहीं इस पर कई सवाल भी खड़े हो रहे है। सवाल यह है कि इसके लिए क्या भाजपा जिम्मेदार है? या फिर कांग्रेस के अंदर केही नेता इसके लिए जिम्मेदार है? सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या यह प्लान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने राजनीती में अपने बेटों को और ऊंचाई पर ले जाने की राह में कांटे बने सिंधिया को बाहर निकाल फेंकने का था? इस पर बात कई कांग्रेस के नेता इनकार नहीं कर रहे है।

बगावत के लिए किया मजबूर?
सूत्रों की माने तो मध्य प्रदेश प्रदेश के सियासी संकट के लिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है। कई कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि सिंधिया को एक साजिश के तहत बगावत करने पर मजबूर किया गया। सिंधिया ने ऐसी कोई बड़ी शर्त नहीं रखी थी जिसे पूरा करना कमलनाथ और कांग्रेस आलाकमान को संभव नहीं था।

सिंधिया की राह में दिग्विजय बने रोड़ा?
राजनितिक हलाकों में चर्चा है कि पहली वरीयता वाली राज्यसभा सीट अगर सिंधिया को दी जाती तो वह कभी बागी तेवर नहीं अपनाते। वहीं  राजनितिक जानकारों की माने तो शुरू से ही दिग्विजय सिंह सिंधिया की राह पर रोड़ा बने रहे है। दिग्विजय सिंह पर हमेशा आरोप लगे है कि उन्होंने ने ही सिंधिया को मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बनने नहीं दिया। मुख्यमंत्री के समय भी दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ के नाम पर आलाकमान को राजी किया था। इससे पहले भी दिग्विजय सिंह ने सिंधिया को कई मौकों रोकने की कोशिश की।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबियों का कहना है कि सिंधिया के लिए कांग्रेस छोड़ने का फैसला इतना आसान नहीं था। राहुल गांधी की टीम के खास सदस्यों में रहे सिंधिया की पूरी कांग्रेस सुनती थी। लेकिन कुछ समय से वह अपने ही मध्य प्रदेश राज्य की राजनीती में खुद को बेगाना समझने लगे थे।

कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का पुत्र मोह
सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का पुत्र मोह जोतिरादित्य सिंधिया की बगावत करने की मुख्य वजह है। दोनों नेताओं अपने बेटों को मध्य प्रदेश की राजनीती में स्थापित कर दिया है। कमलनाथ अपने बेटे नकुल नाथ को छिंदवाड़ा सीट से सांसद बना चुके है। वहीं दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री है। 

राजनितिक जानकारों का यह भी कहना है कि कमलनाथ और दिग्वविजय सिंह के रिटायर होने के बाद सिंधिया का मध्यप्रदेश में रास्ता साफ हो जाता जिसका असर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बेटों की आगे की महत्वकांक्षाओं पर पड़ता और इसीलिए दोनों नेताओं ने सिंधिया को निकालने की रणनिति बनाई।