मध्य प्रदेश सियासी संकट, बागी विधायकों को 15 मार्च से पहले पेश होने का नोटिस

भोपाल,मध्यप्रदेश में राजनीतिक घमासान अपने उफान पर है। जहाँ कांग्रेस के बागी पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव हुए हैं। वहीं अब इस आफत से

भोपाल,मध्यप्रदेश में राजनीतिक घमासान अपने उफान पर है। जहाँ कांग्रेस के बागी पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव हुए हैं। वहीं अब इस आफत से लड़ने के लिए कांग्रेस और कमलनाथ ने अपनी कमर कस ली है। इसके साथ ही अब मध्य प्रदेश विधानसभा स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने बागी कांग्रेसी विधायकों को 15 मार्च तक पेश होने का नोटिस दे दिया है। 

विदित हो कि कुछ दिनों पूर्व ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के कुल 22 विधायकों ने बागी तेवर अपनाकर विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया था। यह सभी अब बेंगलुरु में हैं। हालाँकि इनसे निलने के लिए कमलनाथ के ख़ास जीतू पटवारी बेंगलुरु भी पहुंचे थे लेकिन यह मुमकिन नहीं हो पाया। इस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल को पात्र लिखकर अपने बंधक विधायकों को वापस लाने की मांग की और साथ ही बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण के बाद फ्लोर टेस्ट भी करवाने का अनुरोध किया। लेकिन यह तभी संभव हो सकता है जब बागी 22 विधायक वहां मौजूद हों। 
 
हालाँकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने से मध्यप्रदेश सरकार थोड़ी विचलित तो हुई है लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ का भी अपना विलक्षण राजनीतिक अनुभव है और वे इस प्रकार के चुनौतियों का सामना करना भलीभांति जानते हैं। वहीं कांग्रेस की आला कमान भी उनपर पूर्ण विश्वास रखे हुई है कि संकट की इस घडी में वे पार्टी के तारनहार साबित होंगे।