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नयी दिल्ली. देश के आठ विपक्षी दलों ने केंद्रीय कृषि कानूनों को देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा करार देते हुए शनिवार को दावा किया कि दिल्ली की तरफ बढ़ रहे किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ना, पानी की बौछार मारना और सड़कें खोदना कृषकों के विरूद्ध ‘युद्ध छेड़ने’ की तरह है। इन दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर केंद्रीय कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन भी किया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, द्रमुक नेता टी आर बालू, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा महासचिव डी राजा, राजद सांसद मनोज झा, भाकपा (माले) के महासचिव दिपांकर भट्टाचार्य, फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता देवव्रत विश्वास और आरएसपी महासचिव मनोज भट्टाचार्य की ओर से यह संयुक्त बयान जारी किया गया है।

इन नेताओं ने कहा, “आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल करना, रास्ते बंद करना, पुलिस बैरिकेड लगाना और राजमार्गों को खोद देना हमारे किसानों के खिलाफ युद्ध छोड़ने की तरह है।”

उन्होंने कहा, “हम किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे इन किसानों के समर्पण और साहस को सलाम करते हैं।” इन विपक्षी नेताओं के मुताबिक, किसानों को दिल्ली के बुराड़ी में विरोध प्रदर्शन के लिए जो मैदान दिया गया है वो बहुत छोटा है।

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि रामलीला मैदान या इसी तरह का कोई दूसरा बड़ा मैदान इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए दिया जाए और किसानों की सुरक्षा और भोजन के जरूरी प्रबंध किए जाएं।”

विपक्षी नेताओं ने दावा किया, “हम एक बार फिर इन कानूनों के खिलाफ अपना विरोध प्रकट करते हैं। ये कानून भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं तथा इनसे न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म हो जाएगा, खेती और किसान बर्बाद हो जाएंगे।”