इंदिरा गाँधी-करीम लाला वाले बयान से संजय राउत ने मारी पलटी

मुंबई, महाराष्ट्र में फिर सियासी दाँव -पेंच शुरू हो चुके हैं। लेकिन इस बार इसका केंद्र बिंदु इस बार पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गाँधी और 80 के दशक के कुख्यात डॉन करीम लाला है। विदित हो

मुंबई,  महाराष्ट्र में फिर सियासी दाँव -पेंच शुरू हो चुके हैं। लेकिन इस बार इसका केंद्र बिंदु इस बार पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गाँधी और 80 के दशक के कुख्यात डॉन करीम लाला है। विदित हो कि कल एक मीडिया समुह को दिएएक साक्षात्कार में शिवसेना के कद्दावर नेता संजय राउत ने यह बयान दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में पुराने डॉन करीम लाला से मिलने आती थीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी जैसे गैंगस्टर महानगर और आस-पास के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते थे और तय करते थे कि पुलिस आयुक्त कौन बनेगा, मंत्रालय (सचिवालय) में कौन बैठेगा।

कल बुधवार को दिए गए इस साक्षात कार में संजय राउत यह भी कह बैठे कि " एक समय था जब दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील, शरद शेट्टी तय करते थे कि मुंबई का पुलिस कमिश्नर कौन होगा और ‘मंत्रालय’ में कौन बैठेगा। इंदिरा गांधी तो करीम लाला से मिलने भी आती थीं। हमने देखा है कि अंडरवर्ल्ड का वर्चस्व क्या होता है, अभी तो सिर्फ ‘चिल्लर’ है। " 

वहीं जब आज तमाम मीडिया हाउस और महारष्ट्र के राजनेताओं ने इस पर सियासत आरम्भ कि तो संजय राउत आज अपने ट्वीटर पर यह सफाई देते हुए नजर आये कि उन्होंने दिरा गांधी, पंडित नेहरू, राजीव गांधी और गांधी परिवार के प्रति जो सम्मान दिखाया है वह विपक्ष भी कभी नहीं कर पाया। उन्होंने ये भी कहा कि जब भी इंदिरा गांधी पर लोगो ने निशाना साधा है, वे उनके सम्मान के लिए उठ खड़े हुएँ हैं। अपने ट्वीटर पर उन्होंने लिखा कि " मैंने इंदिरा गांधी, पंडित नेहरू, राजीव गांधी और गांधी परिवार के प्रति जो सम्मान दिखाया है, वह विपक्ष में होने के बावजूद किसी ने नहीं किया है। जब भी लोगों ने इंदिरा गांधी पर निशाना साधा है, मैं उनके लिए खड़ा हुआ हूं"।

अब यह देखना भी रोचक होगा कि इंदिरा गाँधी और करीम लाला पर वक्तव्य देकर संजय राउत ने जिस चिंगारी को हवा दी है। उसकी राजनीतिक आग कितने दूर तक फैलेगी और इस आग को उद्धव ठाकरे कैसे संभालेंगे।