BHR के बड़े कर्जदार जांच के दायरे से दूर

  • उनकी संपत्ति बेच कर निवेशकों का लौटाएं पैसा

जलगांव. 1100 करोड़ रुपये के बीएचआर घोटाले (BHR SCAM) में जितेंद्र कंडारे (Jitendra Kandare), सुनील झंवर (Sunil Jhanwar) सहित खरीदारों और बिचौलियों की जांच की जा रही है, लेकिन बड़े कर्जदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई सामने नहीं आ रही है।

इसलिए बड़े कर्जदारों से उनकी संपत्ति बेचकर बीएचआर के निवेशकों (Investors) को वह पैसा तत्काल उपलब्ध कराने की मांग पीड़ित निवेशक कर रहे हैं। भाईचंद हीराचंद रायसोनी मल्टीस्टेट पतसंस्था (BHR) में तत्कालीन संचालक मंडल ने करोड़ों का कर्ज वितरित कर भ्रष्टाचार किया। इस संस्था की ढाई सौ से ज्यादा शाखाएं हैं।

कई संस्था संचालकों पर मामला दर्ज

इस संस्था में हुए गैर व्यवहार के चलते प्रदेश में 70 से 80 जगहों पर संचालकों, अध्यक्ष और अधिकारियों के खिलाफ गुनाह दर्ज किया गया है। इसमें चेयरमैन प्रमोद रायसोनी (Chairman Pramod Raisoni) समेत अन्य संचालक मंडल गिरफ्तार हुए हैं। दूसरी ओर पतसंस्था को डूबी हुई घोषित कर निवेशकों का पैसा निकालने के लिए यहां प्रशासक नियुक्त किया गया है। प्रशासक ने ही संचालकों से आगे बढ़कर संस्था की करोड़ों की संपत्ति मिट्टी के मोल बेच दी। बड़े लोगों का फायदा पहुंचा कर प्रशासक ने खुद भी बहती गंगा में हाथ धो लिए। इसके चलते निवेशक अधर में ही लटके गए हैं। आज भी बड़े कर्जदारों से पैसा वसूलकर निवेशकों को दिया जाता है तो निवेशकों को बड़ी राहत मिल सकती है।

कुछ ही आरोपियों पर अधिकारियों का ध्यान

अभी जांच पड़ताल के दौरान देखा जा रहा है कि अधिकारियों का फोकस सिर्फ व्यवसायी सुनील झंवर, निवेशकों के संगठन के विवेक ठाकरे, सीए महावीर जैन, धरम सांखला और प्रशासक जितेंद्र कंडारे पर ही है। संस्था के बड़े-बड़े कर्जदार हैं जो करोड़ों रुपये डकार चुके हैं। उन पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता। हालांकि इसमें से कुछ लोगों ने ईमानदारी के साथ कर्ज चुकता किया है। पर बड़े कर्जदारों से कर्ज का पैसा ब्याज समेत वसूलने पर किसी का ध्यान नहीं है। यह लोग जांच के दायरे से भी कोसों दूर नजर आते है। इसलिए निवेशकों का कहना है कि सरकारी यंत्रणा को संस्था के बड़े कर्जदारों पर भी शिकंजा कसकर उन्हें भी जांच के दायरे में लेकर उनसे पैसा वसूलना चाहिए।