खड़से के राकां में आते ही बदलने लगा समीकरण

  • मनपा में सत्ता परिवर्तन या प्रशासक नियुक्त होगा?
  • फैसले पर नागरिकों की लगीं नजरें

जलगांव. जैसे ही एनसीपी का जलगांव जिला नेतृत्व एकनाथराव खड़से के हाथ में आया, राजनीतिक समीकरणों की गणना नए सिरे से प्रस्तुत की जाने लगी हैं. इसमें जलगांव महानगर पालिका भी शामिल है. भाजपा से राष्ट्रवादी कांग्रेस में आये खड़से अब मनपा में सत्ता परिवर्तन करते हैं या मनपा पर प्रशासक नियुक्त करने की दृष्टि से प्रयास करते हैं, इस ओर सारे शहरवासियों की नजरें लग गयी हैं.

स्पष्ट बहुमत के बावजूद नहीं हो रहा कार्य

जलगांव महानगर पालिका में कुल 75 नगरसेवकों में से 57 नगरसेवक अकेले भाजपा के साथ हैं. शिवसेना के पास 15 और एमआईएम के पास तीन हैं. तत्कालीन मंत्री गिरीश महाजन के नेतृत्व में भाजपा ने डेढ़ साल पहले मनपा में सत्ता पर कब्जा कर लिया था.लेकिन भाजपा स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद जलगांव का चेहरा नहीं बदल पाई है. पार्टी के पास 57 सदस्यों का बहुमत है, लेकिन आम सहमति नहीं है. शहर में कोई विकास काम नहीं हुआ  है, सड़कों के बारे में बात करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

स्ट्रील लाइट के नीचे अंधेरा

सफाई अनुबंध से प्रतिशत के गंभीर आरोप लगे हैं, स्ट्रीट लाइट के नीचे अंधेरा है. इसके अलावा, मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के सभापति पदों से भाजपा पार्षदों में बेचैनी छिपी नहीं है. केवल विशेष लोगों को मौका दिया जा रहा है, कहते हुए नगरसेवक अपना दुखड़ा रो रहे हैं.

तड़फड़ा रहे दूसरे दलों से आए नेता

महानगर पालिका में सत्ता हासिल करने के लिए उस समय कई नगरसेवकों को कई आश्वासन देकर महाजन ने भाजपा की ओर खींचा था. सुरेश जैन समूह के साथ-साथ राकां के उम्मीदवारों को भी भाजपा में लाया गया.अब इन सब को संभालने में नेतृत्व विफल होने की चर्चा है.क्योंकि अन्य दलों को छोड़कर भाजपा का दामन थामनेवाले पार्षद भी भाजपा नेताओं के खिलाफ बोलने लगे हैं.

एकनाथराव खड़से जैसे ही एनसीपी में शामिल हुए और जिले का नेतृत्व संभाला,जलगांव महानगर पालिका में असंतुष्ट भाजपा नगरसेवकों की उम्मीदें बढ़ गयी हैं.अगर ये नगरसेवक चाहते हैं कि उनके साथ हुए अन्याय को हटाया जाए, तो उन्हें खडसे के साथ जाना होगा और पार्टी में थोड़ा बदलाव करना होगा. खडसे अगर इस दिशा से कोई फैसला लेते हैं तो यह असंभव भी नहीं है.शिवसेना, कांग्रेस और राकां राज्य में एक साथ सत्ता में है.

मनपा में भी आजमा सकते हैं राज्य का फार्मूला

जलगांव महानगर पालिका में भी यही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है. शिवसेना के पास 15 पार्षद हैं,उनको साथ लेकर मनपा में बदलाव लाया जा सकता है.इसके साथ ही एक अन्य विकल्प मनपा पर प्रशासक नियुक्त  करने का भी सामने आ रहा है.नगर निगम अधिनियम की धारा 452 के अनुसार, राज्य सरकार के पास नगर निगम को भंग करने की शक्ति है.यदि नगर निगम अपने निर्धारित कर्तव्यों को पूरा नहीं कर रहा है और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है तो यह कार्रवाई की जा सकती है.इससे पहले महानगर पालिका को अपना पक्ष रखने का अधिकार है.अगर सरकार उसके बाद भी संतुष्ट नहीं होती है, तो बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है.

खडसे ने नगर निगम पर ध्यान देना जारी रखा

एनसीपी में शामिल होने के बाद खडसे जलगांव में थे. इस दौरान उन्होंने मनपा आयुक्त सतीश कुलकर्णी से चर्चा की.हालांकि यह कहा जा रहा है कि दोनों के बीच बैठक में नागरिक सुविधाओं को लेकर चर्चा हुई.लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि खड़से ने नगर निगम पर ध्यान देना शुरू कर दिया है.एकनाथराव खडसे और गिरीश महाजन के बीच चल रहा राजनीतिक झगड़ा सभी जानते है.महाजन ने ही जलगांव महानगर पालिका पर भाजपा की सत्ता स्थापित की है.खड़से अब भाजपा में नहीं हैं,वह महाजन और भाजपा के विरोधी बन गए हैं.इसलिए जलगांव महानगर पालिका पर वह राष्ट्रवादी कांग्रेस का झंडा फहराने की दृष्टि से प्रयास करने की संभावना दिखाई दे रही है.