The eyesight of 4 children will end after some time, the parents decided to show the whole world
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    -सीमा कुमारी

    एक माता-पिता की खुशी उस वक्त दोगुनी हो जाती है, जब उनका बच्चा पहली बार अपनी तोतली जुबान से मां बोलता है। दरअसल, हर बच्चा जन्म के बाद अपने परिवार में बोली जाने वाली भाषा को धीरे-धीरे बोलने की कोशिश करता है। ऐसे में कुछ बच्चे जल्दी बोलना सीख जाते हैं, तो कुछ बोलने में थोड़ा समय लेते हैं। ऐसे में उनके माता-पिता को चिंता होने लगती है, कि उनका बच्चा आखिर बोल क्यों नहीं पाता और उनके मन में कई सवाल भी आते रहते हैं।

    आखिर क्यों देर से बोलते हैं बच्चे ?

    हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जो बच्चे जन्म के बाद देर से रोते हैं, ऐसे बच्चे बोलना भी देर से शुरू करते हैं। यानी जो शिशु जन्म के समय खुलकर न रोए या उसे रुलाने के लिए कोई उपचार करना पड़े, ऐसे बच्चे अक्सर देर से बोलना सीखते हैं। इसके  अलावा गर्भावस्था के समय (during pregnancy) मां के जॉन्डिस से ग्रस्त होने अथवा नॉर्मल डिलीवरी के समय बच्चे के मस्तिष्क की बायीं तरफ चोट लग जाने की वजह से भी बच्चे की सुनने की शक्ति क्षीण हो जाती है।

    सुनने और बोलने का गहरा संबंध है। जो बच्चा ठीक से सुन नहीं पाता वह बोलना भी आरंभ नहीं करता। लगभग छह महीने का बच्चा 17 प्रकार की विभिन्न ध्वनियों को पहचानने की क्षमता रखता है और यही ध्वनियां आगे चलकर विभिन्न भाषाओं का आधार बनती है।

    इन बातों का रखें ध्यान-

    अगर आप नवजात शिशु की मां हैं तो इन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखें-

    जब शिशु कुछ महीने का हो जाए, तो ध्वनि वाले खिलौनों की सहायता से उसके सुनने की शक्ति को जांचना चाहिए। यदि सुनने में कोई समस्या लगे तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। खेल-खेल में बच्चे को खिलौनों तथा वस्तुओं के नाम बताएं तथा उसे दोहराने के लिए बोलें।

    जब बच्चा पूरा वाक्य बोलने लगे तो उसे नर्सरी राइम्स सुनाएं तथा उसकी कुछ पंक्तियों को दोहराने में बच्चे की सहायता करें। सही दोहराने पर उसे शाबाशी भी दें। मां बच्चे की प्रथम शिक्षिका है और उसके प्रयासों से ही उसकी परवरिश सही ढंग से हो सकती है।

    इन सामान्य उपायों को अपनाने से हो सकता है कि आपके बच्चे जल्दी बोलना सीख जाएं।