आखिर क्यों महिलाएं नहीं छुपा पाती हैं कोई बात, महाभारत काल से जुड़े हैं इसके तार- जानें सब-कुछ

    नई दिल्ली : हमेशा से ऐसा कहा जाता है कि महिलाएं कोई भी बात या सीक्रेट छिपा नहीं पाती हैं। महिलाएं कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन वे अपनी मन की बात कहीं ना कहीं शेयर जरूर करती है। कभी आपके मन में सवाल आया है कि आख़िरकार महिलाएं कोई बात क्यों नहीं छुपा पाती है? आज हम आपके इस सवाल का जवाब इस लेख के माध्यम से देने वाले हैं। ऐसा कहां जाता है कि इसके तार महाभारत के एक घटना से जुड़ हुए है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्या वजह है कि महिलाएं कोई बात नहीं छुपा पाती है… 

    महिलाएं कोई भी बात क्यों नहीं छुपा पाती इस बात को हम महाभारत की एक घटना से समझने की कोशिश करेंगे।    महाभारत के अंतिम दिनों में अश्वत्थामा ने पांडव पुत्र का विश्वास तोडा। इसके बाद क्रोधित पांडव और भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा का पीछा किया और महर्षि वेद के आश्रम में पहुंच गए। हालांकि महाभारत को हजारों साल बीत चुके हैं, लेकिन उस दौर में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं और लोग अभी भी इसके बारे में उत्सुक हैं।  महाभारत में समय से जुड़े कई श्राप और आशीर्वाद हैं, जिनका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है। तो आइए जानते हैं महाभारत काल से जुड़े ऐसे ही श्रापों के बारे में… 

    युधिष्ठिर ने माता कुंती को दिया था श्राप 

    महाभारत के युद्ध में जब दानवीर कर्ण मारा गया था, तब मां कुंती ने पांडवों के पास जाकर कहा था कि कर्ण उनका बड़ा भाई है। पांडवों को यह सुनकर दुख हुआ। इसके बाद जब पूरा परिवार शोक की स्थिति में था तब युधिष्ठिर माता कुंती के पास गए और उन्हें श्राप दिया कि दुनिया की कोई भी महिला आज से कोई रहस्य नहीं छिपा सकती। महाभारत के युद्ध से पहले अर्जुन दिव्यास्त्र सीखने के लिए स्वर्ग गए थे। वहां उर्वशी नाम की एक अप्सरा अर्जुन पर मोहित हो गई।  इसके बाद जब उर्वशी अपने मन की बात अर्जुन को बताती हैं तो अर्जुन उर्वशी को अपनी मां कहकर संबोधित करते हैं।

    महाभारत के अंतिम दिनों में, अश्वत्थामा ने पांडव पुत्रों को धोखा दिया। इसके बाद क्रोधित पांडव और भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा का पीछा किया और महर्षि वेद व्यास के आश्रम पहुंचे।  असुरक्षित महसूस करते हुए, अश्वत्थामा ने अपनी रक्षा के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया, अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया। वेदव्यास ने हथियारों का प्रयोग बंद कर दिया और शस्त्रों को वापस लेने का आदेश दिया। 

    जब अर्जुन ने हथियार वापस ले लिया, तो अश्वत्थामा ने हथियार की दिशा बदल दी और अभिमन्यु की पत्नी को उत्तरा के गर्भ में छोड़ दिया।  इससे क्रोधित होकर भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा को 3000 वर्ष तक पृथ्वी पर भटकने का श्राप दिया। इसके बाद उन्हें फांसी दी गई, लेकिन ज्यादा देर तक नहीं।  इसके बाद राजा को गलती का अहसास हुआ और मांडव ऋषि को नीचे उतारा गया। ऋषि के यमराज से मिलने और सजा का कारण पूछने के बाद, यमराज ने कहा कि 12 साल की उम्र में आपको एक की कीड़ें की पूंछ में एक सुई चुभोई थी।  यह सुनकर ऋषि क्रोधित हो गए और उन्होंने कहा कि इस उम्र में कोई भी धर्म और अधर्म को नहीं जानता है, इसलिए मैं आपको शाप देता हूं कि आप इस धरती पर दास के रूप में पैदा होंगे। महाभारत के युद्ध में कौरव वंश का अंत हो गया।

    मां गांधारी ने अपने 100 बच्चों को खो दिया।  इसके बाद जब भगवान कृष्ण उनसे मिलने गए, तो माता गांधारी ने क्रोधित होकर कहा कि जैसे मेरे 100 पुत्र मर गए हैं, वैसे ही तुम्हारे यदु वंश के लोग एक दूसरे को मार डालेंगे। इस कहानी से हमें यह पता चला की माता कुंती ने एक बात छुपाई तो बदले में युधिष्ठिर ने उन्हें श्राप दिया की कभी कोई बात न छुपाएं। महाभारत के हर एक अध्याय हमें अनमोल सिख देते है।