death
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    नयी दिल्‍ली. कहते हैं कि जिस तरह जन्‍म (Birth) से पहले व्‍यक्ति 9 महीने तक अपनी जीवनदायिनी माँ के गर्भ में रहता है और धीरे-धीरे क्रमशः बढ़ता है। वैसे ही इंसान अपनी मौत (Death) से पहले के 9 महीने की अवधि में भी व्‍यक्ति के शरीर में कई अहम और बड़े बदलाव आते हैं। बताया जाता है कि ये मौत आने के प्रबल संकेत होते हैं। समय के साथ मौत के नजदीक आने पर कई ऐसी चीजें होती हैं, जो व्‍यक्ति को शायद एकदम अलग प्रकार का अनुभव देती हैं। इस बाबत पुरानों पुराणों में भी बहुत ज्यादा विस्‍तार से बताया गया है। ऐसे में यदि व्‍यक्ति इन संकेतों (Indications) पर ध्‍यान दे तो वह शांत और शायद एक आसान मृत्‍यु को पा सकता है। 

    टूटने लगते हैं सभी जीवन चक्र 

    अब अगर हम योग विज्ञान की मानें तो व्‍यक्ति के शरीर में 7 चक्र होते हैं। ऐसे में जब मृत्यु का समय नजदीक आता है तो व्यक्ति विशेष का नाभि चक्र टूटने लगता है। जन्‍म के समय मानव का शरीर भी इसी चक्र से ही बनना शुरू होता है और उसके प्राण भी यहीं से ही निकलते हैं। इस चक्र टूटने के चलते और इसके दौरान शरीर में कई बदलाव आते हैं। अब यदि उन्‍हें समय रहते महसूस कर लिया जाए तो पता लग जाता है कि मृत्यु का समय अब करीब है। 

    गरुड़ पुराण में है इनका वर्णन 

    • ऐसा ही गरुड़ पुराण (Garuda Purana) समेत कई बड़े शास्‍त्रों में मृत्यु आने से पहले के कुछ अहम और बड़े संकेत बताए गए हैं। 
    • मृत्यु से पहले व्‍यक्ति को अपनी नाक दिखाई देना बंद हो जाती है। 
    • इसके साथ ही उसे तेल या पानी में अपनी परछाई नहीं दिखाई देती है। शायद इसलिए कहा जाता है कि मृत्यु के समय आपकी परछाई भी आपका साथ छोड़ देती है।  
    • मौत से पहले व्‍यक्ति के हाथ की रेखाएं एकदमही  हल्‍की पड़ जाती हैं। यहां तक कि वे बमुश्किल ही दिखाई पड़ती हैं। 
    • व्यक्ति को सपने में भी कुछ अजीबोगरीब चीजें दिखाई देने लगती हैं, जैसे बुझे  हुआ दीपक का सपने में दिखाई देना। 
    • मौत से से पहले व्‍यक्ति अपने आसपास आत्माओं के वास का होना महसूस करने लगता है। शायद ये उसके पूर्वजों की ही आत्‍माएं होती हैं, जो उसके परलोक में उसके आने का जश्‍न मनाने लगती हैं, क्‍योंकि कहते हैं कि मरने वाला उनका परिजन अब उनके पास ही तो आने वाला होता है। 
    • मौत से पहले व्‍यक्ति विशेष की सांसे उल्‍टी चलने लगती हैं। ऐसे कई बार उसे यमदूत इस तरह करीब नजर आने लगते हैं कि तब उसे अपने आसपास मौजूद लोग भी दिखाई नहीं देते हैं। 

    (नोट: इस लेख में दी गई समस्त सूचनाएं मात्र सामान्य जानकारी और इससे जुडी मान्यताओं पर आधारित हैं। नवभारत इनकी पुष्टि नहीं करता है।)