मछुआरा नहीं, फरिश्ता है यह शख्स, डूब रहे 49 लोगों को दी नई जिंदगी

  • समंदर से 55 लोगों के शव बाहर निकाल चुके हैं राजाराम जोशी

-तारिक खान

मुंबई. मुंबई और नवी मुंबई को जोड़ने वाले वाशी खाड़ी के ब्रिज आत्महत्या (Suicide) करने वालों के लिए हॉट स्पॉट बनता जा रहा है और अब तक इस पुल से कूद कर न जाने कितने ही युवाओं और महिलाओं ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। पर राजाराम जोशी उर्फ़ भाऊ (43) न होते तो आज यह संख्या बहुत बढ़ गई होती।

इसी वाशी गांव में रहने वाले और वाशी क्रीक (Vashi Creek) में मछलियां पकड़ कर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले भाऊ एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अब तक इसी ब्रिज से कम से कम 49 लोगों को डूबने से बचा चुके हैं। उनमें ज्यादातर वे लोग हैं, जिन्होंने सुसाइड करने का प्रयास किया है। इसके अलावा वे 55 मृतकों के शव जो भी पानी से बाहर निकालने में मदद की है।

संकट मोचक मछुआरा

राजाराम जोशी अब तक इतना लोगों को बचा चुके हैं कि वे ना सिर्फ पीड़ितों के बल्कि आसपास के पुलिस स्टेशन और और फायर ब्रिगेड अधिकारियों की पहली पसंद हैं और उनके लिए वे संकट मोचक की भूमिका निभा रहे हैं। जब भी वाशी पुलिस और नवी मुंबई फायर ब्रिगेड को किसी आत्महत्या की कोशिश के बारे में जानकारी मिलती है, तो उनका सबसे पहला कॉल राजाराम को जाता है। अक्सर ऐसा होता है कि जोशी घटनास्थल पर पहले पहुंचते हैं और फायर ब्रिगेड बाद में। पुलिस के सूत्रों के अनुसार बॉलीवुड की मशहूर हिंदी फिल्म आशिकी के रिलीज़ होने के बाद वाशी खाड़ी के पुल से आत्महत्या की घटना में बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि एक पात्र ने अपने जीवन से निराश हो कर फिल्म में इसी पुल से छलांग लगा कर आत्महत्या की थी।    

7 मिनट में पहुंच जाते हैं जोशी  

राजाराम जोशी कहते हैं, पुलिस कंट्रोल रूम से फोन कर मुझे डूब रहे व्यक्ति की सूचना मिलती है तो मैं 7 मिनट के अंदर अपनी बाइक से वाशी क्रीक पहुंच जाता हूं। कई बार तो मैं अग्निशमन सेवा के आने से पहले ही पहुंच चुका हुआ होता हूँ। पिछले 8 साल में मैं पुल से छलांग लगा कर आत्महत्या की कोशिश करने वाले 49 लोगों की जान बचा चुका हूं और 55 लोगों का शव पानी से बाहर निकाल चुका हूं, जिनमे महिला और लड़कियां भी शामिल हैं।

नहीं मिली पहचान

राजाराम जोशी को सिर्फ एक ही बात का दुःख है कि अब तक जिन लोगों को बचाया वो कभी मुड़कर मुझसे मिलने नहीं आए और न ही मेरी हालचाल ली। राजाराम के पास कोई बोट नहीं है। अगर इन्हें सरकार की तरफ से एक बोट मिल जाती तो यह और ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम आ सकते हैं। राजाराम जोशी के भाई संजय जोशी कहते हैं, पहले मैं उस पर बहुत चिल्लाया करता था क्योंकि उसका खुद का भी परिवार है, कल को कुछ हो जाएगा तो क्या होगा? लेकिन एक बार राजाराम ने मुझसे कहा कि क्यों ना अपनी ज़िन्दगी में कुछ ऐसा काम करें कि लोग मरने के बाद याद रखें, उस दिन के बाद से हम परिवार वालों ने उसका साथ देने का फैसला कर लिया।

इंसानियत जिंदा है  

राजा राम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, वो मछली पकड़ने जाते हैं और हमारी मदद करते हैं। कई बार हम उसे बुलाते हैं आत्महत्या करने वाले को बचाने के लिए तो कभी किसी की लाश निकालने के लिए, वो बिना सवाल किये हमारी मदद को चला आता है। ऐसे लोगो की वजह से इंसानियत जिंदा है।

विवेक म्हात्रे (अग्निशमन दल अधिकारी नवीमुंबई)

देवदूत है यह

यहां राजारामजी के साथ-साथ महेश सुतार और दत्ता भोईर जैसे देवदूत (मछुआरे) हैं जो अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की जान बचाते हैं। हमने पीडब्ल्यूडी और एमएसआरडीसी को पत्र लिखकर कर इस पुल पर सुरक्षा जाली लगाने और दीवार ऊँची करने की अपील की है ताकि लोग यहां से कूद कर सुसाइड नहीं कर सके।

-संजीव धुमाल (वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक वाशी पुलिस थाना)