डॉ गुप्ता की जीवटता से हारा कोरोना

मुंबई. डॉ कृष्ण कुमार गुप्ता को संक्रमण के बारे में जानकारी नहीं है कि कहां और कैसे हुआ. उनका अनुमान है कि उन्हें खुद के मेडिकल स्टोर पर किसी  कस्टमर से संक्रमण हुआ. डॉ गुप्ता को 17 मई से बुखार आने लगा. कुछ दवाइयां लेने के बाद उन्हें आराम हुआ, लेकिन फिर बुखार आने लगा. उन्होंने 22 मई को कोरोना का टेस्ट कराया. 23 मई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई. 

निमोनिया भी हो गया था 

डॉ. कृष्ण कुमार गुप्ता ने कहा कि डी वाई पाटिल हॉस्पिटल में मैं एडमिट हुआ, क्योंकि वहां पर मेरी बेटी कुछ समय पूर्व डॉक्टर थी, जो इस समय दिल्ली में है. उसके सिफारिश से मुझे डी वाई पाटिल में एडमिट कर लिया गया. वहां डॉक्टर ने मेरा अच्छा इलाज किया. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण मुझे निमोनिया भी हो गया था जो सिटीस्कैन के जरिए पता चला. मेरा निमोनिया का भी इलाज किया गया. डॉक्टर और नर्स हमेशा ख्याल रखते थे. वहां खानपान अच्छा था, सुबह चाय-नाश्ता के अलावा दोपहर और रात्रि में समय पर पौष्टिक भोजन मिलता था. इसके अलावा सूप भी मिलता था. मुझे कोविड-19 के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, अजिथ्रोमाईसीन- 500 एमजी के अलावा विटामिन सी आदि दिया गया. सायन-कोलीवाडा स्थित इंदिरा नगर के रहने वाले डॉ गुप्ता को अस्पताल में 16 दिन रहना पड़ा. उन्हें 7 जून को डिस्चार्ज किया गया. ठीक होने के बाद वे घर पर क्वारंटाइन अवधि भी पूरा कर लिए. 

कोरोना के लेकर लोग पैनिक ना हों

डॉ गुप्ता ने कहा कि कोरोना के लेकर लोग पैनिक ना हों, जरूरत होने पर घरों से निकलें, सोशल डिस्टेंसिंग अवश्य बनाकर रखें. घबराने की जरूरत नहीं है. यदि कोरोना के सिम्टम्स नहीं हैं तो घर में ही आइसोलेट होकर रहना चाहिए और काढ़ा आदि का सेवन करना चाहिए. यदि सिम्टम्स हैं तो अस्पताल में एडमिट होना जरूरी है. लोग खुद नियमों का पालन करें और खतरे को महसूस करें तो इंफेक्शन से बचा जा सकता है तभी मुंबई और देश से कोरोना समाप्त हो सकेगा.