अब नई जगह शिफ्ट होगा मरीन ड्राइव का पारसी गेट

  • कोस्टल रोड के कारण ऐतिहासिक स्मारक एक जगह से हटाकर दूसरी जगह होगा स्थापित

मुंबई. ‘आमची मुंबई’ के ज्ञात इतिहास में पहली बार होगा, जब एक पूरा ऐतिहासिक स्मारक एक जगह से हटाकर दूसरी जगह स्थापित कर दिया जाएगा.

जी हां, हम बात कर रहे हैं मुंबई के पारसी गेट की, जो कोस्टल रोड में एक बाधा बन रही है और अब समुदाय के लोग इसे वर्तमान में मरीन ड्राइव के पास से कहीं अन्यत्र शिफ्ट करने को राजी हो गए हैं और इसके साथ ही बीएमसी को कोस्टल रोड के निर्माण में एक बड़ी बाधा दूर करने में कामयाबी मिल गई है.

गेट के संरक्षण की डिजाइन तैयार

कोस्टल रोड के निर्माण में लगे बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कोस्टल रोड का निर्माण शुरु हो चुका है और पारसी गेट उसकी राह में आ रहा था, और इसे कहीं अन्यत्र शिफ्ट करने की बात चल रही थी और हमें अब इसमें कामयाबी मिली है. उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद पारसी गेट के संरक्षण की डिजाइन तैयार है और उसे बॉम्बे पारसी पंचायत को निर्णय के लिए सौंपा जा चुका है.

समुदाय ने चलाया था ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान

पारसी गेट अगर कोई साधारण निर्माण होता तो महानगरपालिका उसे साधारण औपचारिकताओं के बाद स्वयं ही ध्वस्त कर सकती थी, क्योंकि यह जगह मुंबई महानगरपालिका के कब्जे में है. पर पारसी गेट है अगियारियों के साथ मुंबई में पारसियों के बचे रहे अंतिम स्मारकों और उनके सबसे पूजनीय स्थानों में से एक. इसके संरक्षण के लिए पारसी समुदाय ने हावोवी सुखड़वाला की अगुवाई में ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान चलाया हुआ है. अब बॉम्बे पारसी पंचायत को कह दिया गया है कि वह महानगरपालिका को अपना निर्णय शीघ्र सूचित करे, क्योंकि लेटलतीफी का मतलब है- कोस्टल रोड का निर्माण में विलंब.

आसपास ही शिफ्ट होगा गेट

मुंबई के पारसियों की संस्था के सामने पारसी गेट के संरक्षण के लिए 2 ही विकल्प है एक, वह पंचायत पारसी गेट को मरीन ड्रॉइव पर ही लगभग एक किलोमीटर दूर नरीमन पाइंट के निकट दक्षिण की अल-सबाह कोर्ट बिल्डिंग की तरफ स्थायी रूप से स्थानांतरित करवाने को राजी हो जाए. दूसरे, अगर तारापोर मछलीघर के सामने मौजूदा जगह पर ही पारसी गेट कायम रखना है तो उसे फिलहाल कहीं अस्थायी रूप से स्थांतरित करवाकर कोस्टल रोड की सुरंग का काम पूरा होने का इंतजार करे. पेंच यह है कि सुरंग के बन जाने पर भी पारसी गेट ठीक उसी स्थान पर नहीं होगा. उसे मौजूदा स्थान से 20 मीटर दूर समुद्र की ओर ही जगह मिलेगी यह इसलिए कि कोस्टल रोड के निर्माण की राह में मरीन ड्रॉइव प्रॉमिनेड का बड़ा हिस्सा भी आ रहा है, जिसपर पारसी गेट स्थित है.

मरीन ड्रॉइव से पहले से है पारसी गेट

दो स्तंभों वाले पारसी गेट की डिजाइन और निर्माण शैली प्राचीन पारसी वास्तु से प्रभावित है यह इन पर उत्कीर्ण पारसी रूपांकन देखने से लगता है. यह इस स्थान पर तब से है, जब खुद मरीन ड्रॉइव का अस्तित्व भी नहीं था. पारसी गेट देश के उन कुछ खुले स्थानों में से है, जहां के दोनों स्तंभों के बीच की सीढ़ियों से उतर, समुद्र तट की पतली पट्टी से समुद्र तक जाकर पारसी समुदाय के लोग अपने जलदेवता ‘अवां यजद’ की आराधना किया करते हैं. वर्ष में एक बार मार्च ‘अवां रोज’ के उत्सव पर यहां उनका मेला लगता है. पास में ही हिंदुओं का चंदनवाडी शवदाहगृह है, जहां अंत्येष्टि के लिए आए शवों की भस्मी भी इसी स्थान से समुद्र में विसर्जित की जाती है.

विश्व के 70 फीसदी पारसी भारत में  

ग़ौरतलब है कि पूरे विश्व में सिर्फ डेढ़ लाख पारसी ही बचे हैं जिनमें से 69,601, यानी 70 फीसदी भारत में रहते हैं और इनमें भी 40 हजार अकेले मुंबई में हैं. इसीलिए एक तरह से मुंबई भारत का ‘पारसी गेट’ माना जाता है. अपने इसी चरित्र को चरितार्थ करता है सैलानियों का स्वर्ग कहलाने वाले मरीन ड्रॉइव का पारसी गेट. इसका निर्माण जाने-माने पारसी कारोबारी पालनजी मिस्त्री और दानी-धर्मी भागोजीशेठ खीर ने 1915 में करवाया. दोनों स्तंभों की ऊंचाई करीब 5 मीटर की है. ये स्तंभ मालाड पत्थर से निर्मित और कंकरीट की पीठिका पर हैं.

-विमल मिश्र