Encroachment
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  • देवलापार में छावनी के लिए है यह भूभाग
  • हटने के लिए कोर्ट ऑफ द इस्टेट्स आफिसर ने दिया नोटिस

रामटेक. रामटेक तहसील के देवलापार गांव में राष्ट्रीय महामार्ग क्रमांक 44 के पूर्वी किनारे पर स्थित रक्षा मंत्रालय की 35.57 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण करके कई लोगों ने दूकानें तो कई लोगों ने आलीशान मकान बना लिए हैं. इस कब्जे को हटाने के लिए रक्षा मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों की ओर से एक नहीं, अनेक बार नोटिस जारी किए हैं किन्तु अतिक्रमणकारी टस से मस नहीं हो रहे हैं.

विशेष उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्रालय के थल सेना के सैनिकों की टुकड़ियां लगभग 40 से 45 वर्ष  पूर्व तक जब कभी भी इस राष्ट्रीय महामार्ग से गुजरती थीं तो उनके विश्राम के लिए यह जगह निर्धारित की गई थी, इसलिए स्थानीय लोगों में इसे छावनी के नाम से जाना जाता है. सन् 1975 से 1980 के बाद यहां पर सैनिक टुकड़ियों की छावनी बंद हो गई और फिर खाली भूभाग देखकर अवैध कब्जे का सिलसिला शुरू हो गया.

देवलापार सर्कल के पटवारी जमील शेख ने बताया कि सर्वे नम्बर 193 और 197 सैनिक छावनी के नाम से राजस्व रेकार्ड मे दर्ज है. दोनों सर्वे नम्बर की कुल आराजी 35.57 एकड़ है. शेख ने बताया कि वर्तमान में वहां पर अनेक दूकानें, होटल और कई आलीशान मकान बना लिए गए हैं. 

बिजली विभाग ने भी दिए कनेक्शन

अवैध कब्जा करके वहां पर बनाए गए दूकानों, होटलों और मकानों में  महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड द्वारा विद्युत  कनेक्शन भी दिए गए हैं. नया विद्युत कनेक्शन लेने के लिए ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाणपत्र आवश्यक है. देवलापार ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव ने रक्षा मंत्रालय की जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाए गए मकानों, दूकानों और होटलों को अनापत्ति प्रमाणपत्र कैसे दिया.

हाल ही में 12 अक्टूबर 2020 को रक्षा मंत्रालय के कोर्ट ऑफ स्टेट्स ऑफिसर द्वारा सभी अतिक्रमणकारियों को एक बार पुनः नोटिस भेजा गया है. इस्टेट्स ऑफिसर द्वारा हस्ताक्षरित उपरोक्त नोटिस में कहा गया था कि 27  नवम्बर को  11 बजे उपरोक्त कोर्ट में यदि कोई सबल दस्तावेज है तो उसके साथ उपस्थित रहें अन्यथा एक तर्फी कार्यवाही करने का निर्णय लिया जाएगा. नोटिस मिलने के बाद अवैध कब्जा करके वर्षों से बैठे अतिक्रमणकारियों मे दहशत का वातावरण बन गया है और वे दबी जुबान से यह कहते सुना जा रहे हैं कि मिलिट्री वाले कभी भी कार्यवाही कर सकते हैं. उनका यह भी कहना है कि हम वर्षों से यहां पर अतिक्रमण करके बैठे हैं फिर सेना ने उस समय क्यों नही रोंका जिस समय हम अतिक्रमण कर रहे थे.