मनपा में कर्मचारियों का जमकर प्रदर्शन

  • संगठन ने जताया असंतोष, आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

नागपुर. मनपा कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर गत अनेक माह से भले ही आंदोलन किया जा रहा हो, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है. जिससे संगठन और कर्मचारियों में असंतोष फैलता जा रहा है. प्रशासन की इस कार्यप्रणाली का विरोध करने के लिए ही अब प्रदर्शन किए जाने की जानकारी राष्ट्रीय नागपुर कार्पोरेशन एम्प्लाईज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेन्द्र टिंगने ने दी.

उन्होंने कहा कि यदि निकट भविष्य में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गाया, तो मजबूरन तीव्र आंदोलन शुरू किया जाएगा. प्रदर्शन के उपरांत मनपा आयुक्त राधाकृष्ण बी को स्मरण पत्र भी सौंपा गया है. प्रदर्शन में महासचिव रंजन नलोडे, ईश्वर मेश्राम, प्रवीण तंत्रपाले, मिलिंद चकोले, बाबा श्रीखंडे, भीमराव मेश्राम, पुरुषोत्तम कैकाडे, बलीराम शेंडे, अनिल बारस्कर, राजकुमा्र यादव, अरूण तुरकेल, राजेश हाथीबेड, योगेश बोरकर, प्रकाश चमके, अनलि पुंजे आदि शामिल थे.

तो 28 को होम क्वारंटाइन आंदोलन

चर्चा के दौरान शिष्टमंडल ने कहा कि मनपा कर्मचारियों को 6वें वेतन आयोग तो लागू किया गया, किंतु 59 माह के बकाया का अबतक भुगतान नहीं किया गया है. जबकि वेतन आयोग लागू करने के संदर्भ में मनपा की ओर से 31 दिसंबर 1972 को ही प्रस्ताव पारित कर रखा है. प्रस्ताव पारित होने के बावजूद 7वां वेतन आयोग लागू करने में आनाकानी की जा रही है. इसके अलावा कर्मचारियों के वेतन से जीपीएफ आदि के तहत 125 करोड़ की कटौती की गई, किंतु जीपीएफ खाते में जमा ही नहीं की गई है. जिससे इस तरह की धांधली करनेवाले तत्कालीन वित्त अधिकारी मदन गाडगे के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सेवाएं देते समय 18 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई है. उन्हें 50 लाख के बीमा का लाभ दिया जाना चाहिए. 7वां वेतन आयोग लागू नहीं करने पर 28 अक्टूबर को एक दिन होम क्वारंटाइन आंदोलन करने की चेतावनी भी दी. इसके बावजूद मसला हल नहीं होने पर 7 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की चेतावनी भी दी.