Meditrina Hospital

  • जनस्वास्थ्य योजना को लेकर भ्रष्टाचार का आरोप

नागपुर. कोरोना महामारी के संकटकाल में एक ओर जहां कई अस्पतालों द्वारा मरीजों से अनाप-शनाप शुल्क वसूली किए जाने के मामले उजागर हुए हैं, वहीं अब सरकार के महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना में उपचार के बोगस मरीजों का लेखाजोखा तैयार कर भ्रष्टाचार किए जाने के कथित मामले में मनपा के वैद्यकीय अधिकारी नरेन्द्र बहिरवार द्वारा रामदासपेठ स्थित मेडिट्रिना अस्पताल की सघन जांच करने के आदेश जारी किए गए.

विधायक ठाकरे ने विस में उठाया था मुद्दा

बताया जाता है कि महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना अंतर्गत मरीजों पर उपचार करने के बाद सरकार से उपचार की निधि वसूली जाती है.योजना में मेडिट्रिना अस्पताल द्वारा बोगस लाभार्थियों को दिखाकर लगभग 2 करोड़ का भ्रष्टाचार कर सरकार के साथ धोखाधड़ी की थी. इसे लेकर विधायक विकास ठाकरे ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत मुद्दा उठाया था. चर्चा के दौरान उन्होंने अस्पताल का लाइसेंस ही रद्द करने की मांग की थी. चर्चा पर स्वास्थ्य मंत्री की ओर से जवाब देते हुए पूरे मामले की सघन जांच करने के निर्देश दिए गए थे.लेकिन हमेशा की तरह मनपा की ओर से जांच में ढिलाई बरती गई है. बताया जाता है कि यदि समय पर ही जांच हुई होती, तो कोरोना मरीजों के साथ धोखाधड़ी नहीं हो पाती थी. सरकारी योजना का जरूरतमंदों को लाभ ना देकर बोगस लाभार्थियों को दिखाकर सरकार को इस तरह से चपत नहीं लग पाती थी. 

2 डॉक्टरों की जांच समिति

बताया जाता है कि मेडिट्रिना अस्पताल द्वारा कोरोना मरीजों से भी अधिक वसूली की गई. जिसे लेकर कई शिकायतें भी की गई. इन शिकायतों को देखते हुए नर्सिंग होम अधिनियम 1949 की धारा 5 के तहत सम्पूर्ण मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश डॉ. बहिरवार ने दिए. इसके लिए 2 डॉक्टरों की जांच समिति का भी गठन किया गया है. जांच में अनियमितता पाई जाने पर अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द होने की संभावना मनपा अधिकारियों ने जताई.