Sameet Thakkar

  • न्यायालय ने 30 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा

नागपुर. मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे, केबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे और सांसद संजय राउत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में फंसे भाजपा आईटी सेल के कथित सदस्य समित ठक्कर को पुलिस ने सोमवार को भारी बंदोबस्त के साथ कोर्ट में पेश किया. खुद डीसीपी विनीता शाहू कोर्ट में उपस्थित थी. सरकारी और बचावपक्ष के बीच करीब 1 घंटे तक चली बहस के बाद न्यायालय ने समित को 30 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में रखने के आदेश दिए.

ज्ञात हो कि समित ने राज्य के मंत्रियों के खिलाफ ट्विटर पर कई आपत्तिजनक पोस्ट की थी. शिवसैनिकों द्वारा इसका तीव्र निषेध किया गया. शिवसेना नेता नितिन तिवारी की शिकायत पर सीताबर्डी पुलिस ने समित के खिलाफ मामला दर्ज किया था. समित ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी. उल्लेखनीय है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के बड़े नेता ट्विटर पर समित को फालो करते है. 2 दिन पहले सीताबर्डी पुलिस ने समित को राजकोट से गिरफ्तार किया.

मांगा 14 दिन का पीसीआर 

सोमवार को सीताबर्डी पुलिस थाने के इंस्पेक्टर अमोल देशमुख ने समित को न्यायाल में पेश किया. सुरक्षा के लिहाज से भारी बंदोबस्त लगाया गया था. डीसीपी शाहू खुद पेशी के लिए कोर्ट गई. इससे मामले की संवेदनशीलता का अनुमान लगाया जा सकता है. कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस का घेरा बनाया गया. प्रकरण से संबंधित लोगों को छोड़कर किसी को भी न्यायालय में प्रवेश लेने की अनुमति नहीं दी गई. जिला सरकारी वकील नितिन तेलगोटे ने न्यायालय को बताया कि समित इसके पहले भी विवादों में रहा है. वह समाज में अशांति फैलाने वाले ट्विट करता है. यहां तक की उसने न्याय व्यवस्था को भी नहीं छोड़ा. इसके पीछे किसी बड़े ग्रुप का हाथ हो सकता है. फरार होने के बाद वह दिल्ली, मुंबई और गुजरात गया था. उसकी मदद करने वाले कौन है. ट्विट करने के साधन भी पुलिस को जब्त करने है. इसमें काफी समय लगेगा. इसीलिए आरोपी 14 दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की जानी चाहिए. 

राजनीतिक असहिष्णुता 

पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए बचावपक्ष के वकील प्रकाश जायसवाल, प्रफुल मोहगांवकर, संजय बालपांडे, जयंत अलोनी और परिक्षित मोहिते ने न्यायालय को बताया कि यह सरासर राजनीतिक असहिष्णुता है. सरकार के कार्यों और योजना पसंद नहीं आने पर आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है. समित ने पोस्ट किए है इस बात से वह इंकार नहीं कर रहा. ट्विटर पोस्ट की जांच के लिए उसे पुलिस हिरासत में रखना सही नहीं है. पूरा मामला राजनीतिक द्वेश का है. शिकायतकर्ता भी शिवसैनिक है. आरोपी जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और आगे भी करेगा. इसीलिए पीसीआर नामंजूर किया जाना चाहिए. लंबी जिरह के बाद न्यायालय ने समित को 4 दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की.