Supreme Court

  • पूर्व नगराध्यक्ष ठाकुर की अवैध सम्पत्ति की जांच का मामला

नागपुर. अवैध सम्पत्ति की जांच को लेकर भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिस को चुनौती देते हुए काटोल के पूर्व नगराध्यक्ष चरणसिंह ठाकुर की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिका को हाई कोर्ट की ओर से ठुकराए जाने के बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए सुको का दरवाजा खटखटाया गया.

जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचुड और न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जहां हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, वहीं भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब दायर करने के आदेश दिए. ठाकुर की ओर से अधि. मोहित खजांची और अधि. महेश धात्रक ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि ठाकुर के पास बेहिसाब सम्पत्ति होने की शिकायत विभाग को प्राप्त हुई थी. शिकायत की सत्यता परखने के उद्देश्य तथा पूछताछ के लिए कार्यालय में उपस्थिति रहने का नोटिस दिया गया था.

कड़ी कार्रवाई न करें

सुको की ओर से याचिकाकर्ता ठाकुर के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न करने के भी आदेश दिए गए. ठाकुर की ओर से पैरवी कर रहे वकील का मानना था कि एसीबी को इस तरह से नोटिस जारी करने का अधिकार ही नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में भी बताया गया था कि सुको द्वारा ललिता मामले में जो फैसला दिया है, उसमें एसीबी के मैन्युअल को कानून में किसी तरह की शक्ति प्रदान नहीं की गई है.

इसके अलावा कई तरह के दिशानिर्देश भी दिए गए हैं. जिसमें प्राथमिक जांच की अनुमति नहीं है. यहां तक कि एफआईआर दर्ज करना भी जरूरी है. यदि शिकायत में संज्ञान लेने जैसा मामला नहीं बनता है, तो इसका कोई औचित्य ही नहीं है. किंतु हाई कोर्ट ने याचिका ठुकरा दी थी.