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    नागपुर. सिटी में फिलहाल कोरोना लॉकडाउन के चलते केवल शाम 4 बजे तक ही दूकानों, हॉकरों को छूट दी गई है लेकिन दक्षिण नागपुर में अयोध्यानगर सीमेंट रोड पर तो 4 बजे के बाद भी फुटपाथ व सड़कों पर सब्जी, फलवालों, चाय की गुमटियों आदि का कब्जा जमा ही रहता है. छोटा ताजबाग से तुकड़ोजी पुतला चौक की ओर जाने वाले रोड पर बायीं ओर एक चौड़ा सीमेंट रोड है जो अयोध्यानगर रोड कहलाता है. यह अपने मुहाने यानी शुरुआत से ही अतिक्रमण का शिकार है. इस रोड पर एक सभागृह से शुरुआत होती है और फिर कुछ नोटरी वाले, रेस्टोरेंट, भोजनालय, डेयरी, फूल विक्रेताओं का फुटपाथ पर पूरी दादागिरी से कब्जा है. नोटरी वालों के सामने भारी भीड़ हमेशा नजर आती है. आसपास पूरे परिसर में कई ठेले लगने लगे हैं. धीरे-धीरे पूरे रोड पर खाली जगहों पर अतिक्रमणकारी परमानेंट ठीया बनाने लगे हैं. इससे नागरिकों को दिक्कतें हो रही हैं. 

    कभी नहीं होती कार्रवाई

    रोड पर बायीं ओर 2 सभागृह हैं. यहां आने वाले फुटपाथ पर पार्किंग करते हैं. नोटरी वाले हैं जिनके यहां आने वाले ग्राहकों के वाहन फुटपाथ और रोड पर खड़े किए जाते हैं. इस साइड एक रेस्टोरेंट और एक भोजनालय खुला है जिसकी भीड़ फुटपाथ पर ही लगती है. दोपहिया वाहनों की पार्किंग सड़क को घेरकर की जाती है. इस मोड़ पर हमेशा जाम लगता है. आगे कुछ फल-सब्जी-फूल वालों का अवैध कब्जा है. फर्नीचर वाले के कारीगर फुटपाथ पर ही काम करते नजर आते हैं. अयोध्यानगर उद्यान वाले मोड़ से कुछ ही आगे बायीं ओर साउथ इंडियन डिसेज के 3-4 ठेले, पोहा-तरी के ठेले के साथ ही कुछ और ठेलों का डेरा जमा रहता है. यहां सिटी बस स्टाप पर भी इनका ही कब्जा है. यहां से आगे फुटपाथ ही नहीं, बल्कि रोड के नीचे तक फल-सब्जी की दूकानें लाइन से सजती हैं. अगले मोड़ तक सारे दूकानदारों ने फुटपाथ पर कब्जा जमाया हुआ है.

    बायीं साइड के भी हाल बेहाल

    इस रोड पर बायीं साइड के हाल भी बेहाल हैं. गद्दा-रजाई बनाने वालों से लेकर रेस्टोरेंट वाले, पानठेले वाले, इलेक्ट्रिक की दूकान वाले, 2 मंदिरों के आसपास फूल की दूकान वालों ने फुटपाथ लील रखा है. जो जगह बचती है तो उस पर वाहन की पार्किंग नजर आती है. इस रोड से होते हुए सुबह व शाम के समय परिसर के आसपास की बस्तियों के नागरिक बड़े पैमाने पर वाकिंग के लिए जाते हैं. शाम के वक्त तो उन्हें फुटपाथ पर जगह ही नहीं मिलती क्योंकि उस पर अतिक्रमणकारियों का ठीया जमा रहता है. मजबूरी में ट्रैफिक भरे रोड पर ही लोगों को पैदल चलना पड़ता है. आश्चर्यजनक यह है कि इस व्यस्ततम मार्ग पर नियमित रूप से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होती इसलिए बेखौफ मनमानी चल रही है.